रमजान आदेश विवाद पर सियासत गरम, कांग्रेस नेता अमित जैन ने उठाए सवाल
'हमसफ़र मित्र न्यूज'
रायपुर। छत्तीसगढ़ में रमजान माह को लेकर जारी कथित आदेश का मामला अब राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है। इस मुद्दे पर प्रदेश कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रदेश महासचिव अमित जैन ने बयान जारी कर छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष सलीम राज के दावों पर सवाल उठाए हैं और भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग की है।
अमित जैन ने कहा कि 19 तारीख को जारी एक पत्र में यह उल्लेख किया गया था कि रमजान माह के दौरान मुस्लिम कर्मचारियों को एक घंटा पहले कार्यालय से जाने की अनुमति शासन द्वारा दी गई है। यह पत्र सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और इसमें राज्य सरकार की नीतियों का भी हवाला दिया गया था। हालांकि बाद में यह पत्र हटा लिया गया।
उन्होंने बताया कि इसके अगले ही दिन अल्पसंख्यक विभाग के सचिव अनुपम द्विवेदी ने आधिकारिक रूप से स्पष्ट किया कि राज्य शासन की ओर से ऐसा कोई आदेश जारी नहीं किया गया है और इस प्रकार की जानकारी भ्रामक व निराधार है।
अमित जैन ने सवाल उठाया कि प्रदेश की जनता को यह जानने का अधिकार है कि आखिर सच क्या है—वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष का बयान या शासन के आधिकारिक विभाग की जानकारी। उन्होंने कहा कि यदि किसी जिम्मेदार पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा गलत या भ्रामक जानकारी फैलायी जाती है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने वक्फ बिल को लेकर दिए गए बयानों पर भी स्पष्टीकरण की मांग करते हुए कहा कि यदि नया वक्फ बिल मुसलमानों के हित में बताया जा रहा है, तो यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि पुराने और नए कानून में क्या अंतर है और समुदाय को इससे वास्तविक लाभ क्या मिलेगा।
इसके साथ ही अमित जैन ने जुमे की नमाज में होने वाली तकरीरों के विषय तय करने संबंधी कथित निर्देशों पर भी आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि धार्मिक तकरीरें स्थानीय परिस्थितियों और समाज के मुद्दों के आधार पर होती हैं, ऐसे में किसी व्यक्ति विशेष द्वारा विषय निर्धारित करना धार्मिक परंपराओं में अनावश्यक हस्तक्षेप है।
उन्होंने कहा कि रमजान और रोजेदार कर्मचारियों से जुड़े मामले में फैली भ्रामक जानकारी से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। इसलिए संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देना चाहिए और यदि गलती हुई है तो माफी भी मांगनी चाहिए।


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