पब्लिक एप,एम बी एन एस रिपोर्टर को चकरभाटा सब्जी मार्केट में सरेराह छेक कर गाली गलौज एवं मारपीट करने की कोशिश करने वाले बीजेपी युवा नेता के खिलाफ पत्रकार ने चकरभाठा थाना में दर्ज कराया मामला।
दगोरी से नितेश साहू की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'।
बिलासपुर के एम बी एन एस एवं पब्लिक एप बिल्हा ब्लॉक रिपोर्ट पत्रकार सारथी समाज सेवा के भाव से पत्रकारिता करने वाले क्षेत्र के नामी ईमानदार पत्रकार है जो समाज की बुराइयों को हमेशा समाचार के माध्यम से समाज के सामने रखते हैं नए वर्ष की रात 8:00 बजे वह अपने साथी विजय निषाद के साथ चकरभाटा सब्जी मार्केट गए थे जहां बीजेपी के युवा नेता अजय पाटिल चकरभाटा बस्ती निवासी कुछ लड़कों के साथ उन्हें घेरकर जबरदस्ती गंदी गंदी गाली गलौज एवं मारने की कोशिश करने लगे जिसे स्थानीय लोगों ने समझाया भी मगर बीजेपी नेता अजय पाटिल द्वारा इस बीच प्रेस आई कार्ड भी गुंडागर्दी करके तोड़ दिया गया जिसकी वजह से पत्रकार साथी के इज्जत मान सम्मान को ठेस पहुंचा है इस घटना के दौरान बीजेपी नेता अजय पाटिल को कई बार समझाया गया लेकिन वह अपनी राजनीति पहुंच पकड़ का धौश दिखाते हुए कोई थाना पुलिस मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकता और नेता प्रतिपक्ष धरमलाल कौशिक का मै दाया हाथ एवं उनके पुत्र डॉ देवेंद्र कौशिक को अपना साथी बताकर शराब के नशे में बीच बाजार में पत्रकार सारथी की इज्जत उतार रहा इस घटना के संबंध में पत्रकार सारथी ने चकरभाठा पत्रकार यूनियन के साथ चकरभाठा थाने में मामला दर्ज कराया है एवं कड़ी कार्यवाही की मांग की है एवं कहां है जी अगर किसी राजनीति दबाव में कार्यवाही नहीं हुई तो पत्रकार यूनियन व अन्य समाजसेवी संगठन इस संबंध में आंदोलन करेंगे एवं राजनेताओं के शोषण के शिकार पत्रकारों की सुरक्षा के लिए पत्रकार सुरक्षा कानून को छत्तीसगढ़ में जल्द से जल्द लागू करने की मांग करने के लिए मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री को पत्र लिखेंगे 1 सप्ताह पहले बीजेपी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में शामिल आरोपी अजय पाटिल की कुछ तस्वीरें जिन्हें देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि राजनीतिक संरक्षण मजबूत है तभी ऐसे लोग समाज में गुंडागर्दी कर आम जनता को परेशान करते हैं इस घटना के बाद राजनीतिक पार्टी ऐसे शराबी घमंडी राजनीति के दम पर समाज में गुंडा गर्दी करने वाले एैसे कार्यकर्ता का साथ देती है या पार्टी का नाम गंदा करने वाले ऐसे नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखाती है अब यह तो पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के विवेक पर निर्भर करता है।



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