नौकरी दिलाने के नाम पर ₹5.25 लाख की ठगी, सिटी कोतवाली पुलिस ने आरोपी को किया गिरफ्तार
'हमसफ़र मित्र न्यूज'
बिलासपुर। नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की ठगी करने वाले शातिर आरोपी को सिटी कोतवाली पुलिस ने गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की है। आरोपी ने विभिन्न पदों पर नौकरी लगवाने के नाम पर युवक से कुल ₹5 लाख 25 हजार की धोखाधड़ी की थी।
थाना सिटी कोतवाली पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिनांक 03 फरवरी 2026 को प्रार्थी अभय किशोर तिवारी (निवासी सूरजपुर, वर्तमान निवास दयालबंद, बिलासपुर) ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। प्रार्थी ने बताया कि वह वर्ष 2022 से बिलासपुर में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था, इसी दौरान उसकी पहचान आरोपी से हुई।
अमीन-पटवारी व केमिस्ट पद का झांसा
आरोपी ने स्वयं को प्रभावशाली अधिकारियों से परिचित बताते हुए पहले अमीन-पटवारी पद पर नौकरी लगवाने के नाम पर ₹4,00,000 की मांग की, जिसे प्रार्थी ने UPI के माध्यम से आरोपी को ट्रांसफर किया। इसके बाद आरोपी ने केमिस्ट पद पर नौकरी दिलाने का झांसा देकर ₹1,25,000 और ले लिए। इस प्रकार आरोपी ने कुल ₹5,25,000 की ठगी की।
आरोपी गिरफ्तार
पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 83/2026 धारा 318(4) भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री रजनेश सिंह (भा.पु.से.) के निर्देश पर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री पंकज कुमार पटेल एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्री गगन कुमार (भा.पु.से.) के मार्गदर्शन में सिटी कोतवाली पुलिस टीम ने आरोपी की पतासाजी कर उसे दयालबंद क्षेत्र से गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान राकेश कुमार देवांगन उर्फ दुर्गेश उर्फ गोलू उर्फ मोनू (35 वर्ष), निवासी ग्राम नवापारा हथबंद, तहसील सिमगा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा, वर्तमान निवासी नारियल कोठी, दयालबंद, बिलासपुर के रूप में हुई है।
फर्जी खाते और दस्तावेजों से करता था ठगी
पूछताछ में आरोपी ने फर्जी नामों से लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करना स्वीकार किया। जांच में खुलासा हुआ कि आरोपी ने आदर्श महंत के नाम से बैंक खाता खुलवाया था, जिसकी पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड व सिम अपने पास रखकर ठगी की राशि का लेन-देन करता था।
जप्त सामग्री:
पुलिस ने आरोपी के कब्जे से
फर्जी प्रमाण पत्र
आधार कार्ड की प्रतियां
बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड
अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज
जप्त किए हैं।
विवेचना के दौरान अपराध की गंभीरता को देखते हुए प्रकरण में धारा 338, 336(3), 340(2), 341(2) BNS जोड़ी गई। आरोपी को विधिवत गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

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