तोरवा छठ घाट में धूमधाम से मनाया गया छठ पूजा
बिलासपुर से 'राकेश खरे' की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'
बिलासपुर । उत्तर भारत का प्रमुख पर्व छठ बुधवार को धूमधाम से मनाया गया इस अवसर पर तोरवा छठ घाट में छठ समिति के द्वारा पूरी तैयारी कर ली गई थी तो वही यहां पहुंचने वाले छठ व्रतियों को किसी भी तरह की कोई परेशानी ना हो इसका भी ख्याल रखा गया था चार दिवस के इस पर्व की शुरुआत नहाय खाय के साथ हुई थी जिसके बाद बुधवार को शाम को डूबते अर्थ के साथ तीसरे दिन की पूजा संपन्न हुई डूबते सूर्य को अर्ध्य देने छठ व्रत करने वाले लोग दोपहर से ही छठ घाट में पहुंचने लगे थे और सिर पर सुफ़ा में छठ माता को अर्पित किए जाने वाले पूजन सामग्री को लेकर छठ घाट पहुंचने लगे थे इस दौरान घाट में किसी तरह की समस्या ना हो इसका भी ख्याल रखते हुए सभी छठ व्रत करने वाले लोगों को स्थान सुनिश्चित कराया गया जिसके बाद शाम लगभग 5:30 बजे डूबते सूर्य को अर्ध्य दिया गया गुरुवार को सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही इस पूजा का समापन होगा।छठ पर्व, छठ या षष्ठी पूजा कार्तिक शुक्ल पक्ष के षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है।सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। कहा जाता है यह पर्व बिहारीयों का सबसे बड़ा पर्व है ये उनकी संस्कृति है। छठ पर्व बिहार मे बड़े धुम धाम से मनाया जाता है। ये एक मात्र ही बिहार या पूरे भारत का ऐसा पर्व है जो वैदिक काल से चला आ रहा है और ये बिहार कि संस्कृति बन चुका हैं। यहा पर्व बिहार कि वैदिक आर्य संस्कृति कि एक छोटी सी झलक दिखाता हैं। ये पर्व मुख्यः रुप से ॠषियो द्वारा लिखी गई ऋग्वेद मे सूर्य पूजन, उषा पूजन और आर्य परंपरा के अनुसार बिहार मे यहा पर्व मनाया जाता हैं। हालांकि अब धीरे-धीरे इस पर्व की महिमा देश भर में फैल चुकी है यही वजह है कि छत्तीसगढ़ के विभिन्न शहरों में भी इस पर्व को धूमधाम से मनाया जाता है बिलासपुर के अर्पण छठ घाट के अलावा अरपा नदी के विभिन्न तटों पर भी छठ पूजा का आयोजन कर छठ व्रत करने वाले लोगों ने ने डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया।
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