श्री शववाहिनी मां सभी भक्तों का मनोकामनाएं पूर्ण करती है।
ज्योतिर्गमय आश्रम जिला बलौदाबाजार भाटापारा रोड में स्थित मां शववाहिनी मां काली भक्तो की हर मनोकामनाएं पूरी करती है।
ज्योतिर्गमय आश्रम के स्वामी गुरूदेव श्री प्रकाश शुक्ला जी महाराज का कहना है कि काली हिन्दू धर्म की एक प्रमुख देवी हैं। यह सुन्दरी रूप वाली भगवती दुर्गा का काला और भयप्रद रूप है, जिसकी उत्पत्ति राक्षसों को मारने के लिये हुई थी। उनको ख़ासतौर पर राजराजेशवरी, धारी देवी आदि नामों पूजा जाता है। काली की व्युत्पत्ति काल अथवा समय से हुई है जो सबको अपना ग्रास बना लेता है। माँ का यह रूप है जो नाश करने वाला है पर यह रूप सिर्फ उनके लिए हैं जो दानवीय प्रकृति के हैं जिनमे कोई दयाभाव नहीं है। यह रूप बुराई से अच्छाई को जीत दिलवाने वाला है अत: माँ काली अच्छे मनुष्यों की शुभेच्छु है और पूजनीय है।इनको महाकाली भी कहते हैं।काली का संबंध दस महाविद्या से है देवी निवासस्थान शमशान अस्त्र
खप्पर मुण्ड मुण्डमाला,जीवनसाथी शिव,सवारी शव है।काली का एक और अर्थ होता है -स्याही या रोशनाई होता है।
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति-समन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तुते।।
काली को शाक्त परम्परा की दस महाविद्याओं में से एक भी माना जाता है।
हिन्दू धर्म में सबसे जागृत देवी हैं मां कालिका। मां कालिका को खासतौर पर बंगाल और असम में पूजा जाता है। 'काली' शब्द का अर्थ काल और काले रंग से है। 'काल' का अर्थ समय मां काली को देवी दुर्गा की 10 महाविद्याओं में से एक माना जाता है।
बतलाते हैं कि कालिका के दरबार में जो एक बार चला जाता है उसका नाम-पता दर्ज हो जाता है। यहां यदि दान मिलता है तो दंड भी। आशीर्वाद मिलता है तो शाप भी। यदि आप कालिका के दरबार में जो भी वादा करने आएं, उसे पूरा जरूर करें। जो भी मन्नत के बदले को करने का वचन दें, उसे पूरा जरूर करें अन्यथा कालिका माता रुष्ट हो सकती हैं। जो एकनिष्ठ, सत्यवादी और वचन का पक्का है समझो उसका काम भी तुरंत होगा।


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