शिव जी के सीर पर स्थित हैं यह देवी, जो पाप धोती है
लेखक - पं. प्रदुम्न जी महाराज, मुढ़ीपार, बिल्हा।
'हमसफर मित्र'।
जय श्री राधे। राम चरित्र मानस।आज माता पार्वती जी के मन मे अमर कथा सुनने का दूसरा कारण ये है - जब पार्वती जी विवाह हो कर के कैलास पहुँची तब नजर महादेव जी के ऊपर पड़ीं तो पार्वती जी ने देखा कि एक देवी महादेव के सिर पर चढ़ि है। पार्वती जी कहने लगि आप कौन है देवी, वह देवी ने कहा मैं तुम्हारी बहन हू। आप मेरी बहन कैसे , हिमालय से आपका जन्म हुआ है। हिमालय से मेरा जन्म इसलिये मैं आपकी बहन हू। क्या नाम है, तो कहा गंगा, तो सिर पर क्यो चढ़ी है, गंगा जी ने कहा भगवान ने मुझे आते ही सिर पर चढ़या है । इसीलिये जो देवी आज भी पति के सिर पर आज भी चढ़ती है वह नीचे आने का नाम नही लेती और पति को अपना गुलाम बनाती है। पार्वती जी ने कहा तुमने ऐसा क्या किया जिससे भगवान ने तुझे सिर पर स्थान दिया है। गंगा जी ने कहा तुझे पता नही मैं बड़े बड़े पापियों के पाप को नाश कर देती हूं । कोई मेरा दर्शन करे पाप समाप्त। कोई पापी अगर गंगा कह दे 100 योजन की दूरी तक किनते भी पाप किया है ,,गंगा गंगेती यो ब्रूयात ,योजनानाम शतैरपि ,, गंगा कह दे पाप समाप्त। आज पार्वती जी ने संकल्प लिया मैं भी ऐसी गंगा बहाऊंगी आप यो मृतु लोक के प्राणी के उद्धार करती हो मैं लोक लोकांतर कल्प कल्पान्तर और समस्त लोको को पवित्र करने वाली गंगा। बहाऊँगी ,पूँछेहू रघुपति कथा प्रसंगा , सकल लोक जग पावनी गंगा ,, बाल कांड दोहा न 111 चौपाई न 4
फिर कल
जय श्री राधे पंड़ित श्री प्रदुम्न जी महराज ९९२६२७३७७२🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


No comments:
Post a Comment