रोटी खाने से जज और उनके बेटे की मौत
'हमसफर मित्र'।
बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के जिला न्यायालय के न्यायाधीश और उनके बेटे की मौत रात को रोटी खाने से हो गई। बताया जाता है कि उन दोनों फूड पॉयजिंग का शिकार हो गया था।पिछले 20-21 जुलाई रात को घर में बनाया हुआ चपाती खाएं थे जिसके बाद उन दोनों का तबियत खराब हो गई थी। अगले दिन 22 जुलाई को दिन भर उल्टी और दस्त होते रहे। उनके पत्नी ने कुछ घरेलू उपचार से ठीक करना चाहा पर रोक नहीं पाया। अगले दिन 23 जुलाई को सुचना पाकर जिला अस्पताल के दो डाक्टर घर पहुंचे। डॉ एके पांडे और डॉ आनंद मालवीय ने जज महेंद्र त्रिपाठी और उनके बेटे अभियान त्रिपाठी को एंबुलेंस बुलवाकर अस्पताल ले जाना चाहा पर न्यायाधीश ने इन्कार करते हुए पाढर अस्पताल ले जाने को कहा।
उपचार के बाद स्वस्थ हुए
पाढर अस्पताल में इलाज के बाद दोनों बाप-बेटे स्वस्थ हो गये थे। 25 जुलाई को छुट्टी भी होना था। अचानक फिर से तबियत बिगड़ गया। आनन-फानन में उन दोनों को नागपुर रेफर किया गया जहां रास्तें में ही उनके बेटे अभियान त्रिपाठी का निधन हो गया वहीं आधी रात को न्यायाधीश महेंद्र त्रिपाठी का भी नागपुर अस्पताल में निधन हो गया।
पहले से स्वास्थ्य में नरमी था
न्यायाधीश महेंद्र त्रिपाठी को शुगर और हाई ब्लड प्रेशर का शिकायत पहले से ही था, जिसका उपचार चल रहा था। पर उसका बेटा बॉडी बिल्डर था। उन दोनों को एक साथ चपाती खाने से मौत हो गई पर अभियान की मौत में सवाल खड़ा हो रहा है।
पत्नी ने बनाई थी 6 चपाती
उस दिन जज की पत्नी ने रात को खाने के लिए 6 चपाती बनाईं थी। जिसमें से 2-2 चपाती दोनों बाप-बेटे ने खाया और उसके पत्नी ने चावल खाई थी। सुबह होते ही बाप-बेटे की तबीयत खराब हो गई। उपचार के लिए डॉक्टर न बुलाकर घर पर ही प्राथमिक उपचार करना समझ से परे है।
आटा इंदौर का था
जज की पत्नी ने जिस आटे से चपाती बनाई थी वह आटा इंदौर की थी। उस आटे में किसी भी प्रकार के मिलावट से इंकार किया गया है। बाद में उस आटे में मिलावट करने की बात बन सकती है।

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