बिलासपुर में “डिजिटल अरेस्ट” के नाम पर 82 वर्षीय महिला से ₹1.04 करोड़ की ठगी
'हमसफ़र मित्र न्यूज'
बिलासपुर। साइबर अपराधियों ने एक बार फिर अपनी चालाकी से बड़ी ठगी को अंजाम दिया है। बिलासपुर की एक 82 वर्षीय वरिष्ठ नागरिक महिला को “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाकर ठगों ने ₹1,04,80,000/- की भारी रकम हड़प ली। यह मामला पूरे क्षेत्र में चिंता का विषय बन गया है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 20 अप्रैल 2026 की है, जब महिला के मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से WhatsApp कॉल और मैसेज आया। कॉल करने वाले व्यक्ति ने खुद को “मुंबई पुलिस का अधिकारी” बताते हुए महिला पर “टेरर फंडिंग केस” में शामिल होने का आरोप लगाया।
इसके बाद ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए पुलिस और क्राइम ब्रांच जैसा माहौल तैयार कर महिला को “डिजिटल अरेस्ट” में होने का डर दिखाया। महिला को यह भी कहा गया कि उनके फोन और परिवार की निगरानी की जा रही है और किसी से संपर्क करने पर तत्काल गिरफ्तारी हो सकती है।
कैसे हुई ठगी?
डरे हुए माहौल में महिला से उनके बैंक खाते, एफडी, डेबिट कार्ड सहित पूरी वित्तीय जानकारी ले ली गई। आरोपियों ने “जांच” के नाम पर पैसा सरकारी या RBI खाते में ट्रांसफर करने का झांसा दिया और भरोसा दिलाया कि जांच के बाद रकम लौटा दी जाएगी।
ठगों ने अलग-अलग दिनों में महिला से कुल ₹1,04,80,000/- ट्रांसफर करवा लिए। इतना ही नहीं, बाद में और ₹50 लाख की मांग की गई, जिसके बाद परिजनों को शक हुआ और मामला पुलिस तक पहुंचा।
क्या है “डिजिटल अरेस्ट”?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार “डिजिटल अरेस्ट” पूरी तरह फर्जी तरीका है। इसमें ठग खुद को पुलिस, CBI या अन्य जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं।
पुलिस ने दी स्पष्ट चेतावनी
पुलिस ने साफ किया है कि:
किसी भी व्यक्ति की गिरफ्तारी फोन या वीडियो कॉल पर नहीं होती
कोई भी सरकारी एजेंसी पैसे ट्रांसफर करने को नहीं कहती
WhatsApp पर कोई आधिकारिक नोटिस या वारंट जारी नहीं किया जाता
बैंक डिटेल्स या OTP कभी नहीं मांगा जाता
कैसे रहें सुरक्षित?
ऐसे कॉल आने पर घबराएं नहीं और तुरंत कॉल काट दें
किसी भी परिस्थिति में पैसे ट्रांसफर न करें
परिवार या पुलिस को तुरंत जानकारी दें
अनजान नंबरों से आने वाले वीडियो कॉल से सावधान रहें
मदद के लिए
साइबर हेल्पलाइन नंबर: 1930
वेबसाइट: www.cybercrime.gov.in�
निष्कर्ष
“डिजिटल अरेस्ट” एक झूठा हथकंडा है, लेकिन इसका डर असली होता है। इस घटना ने साबित कर दिया है कि साइबर अपराधी अब बुजुर्गों को निशाना बना रहे हैं। ऐसे में जागरूकता और सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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