आज विश्व आदिवासी दिवस : जानिए आदिवासी दिवस का महत्व : - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Tuesday, August 9, 2022

 


आज विश्व आदिवासी दिवस : जानिए आदिवासी दिवस का महत्व :

'मनितोष सरकार' (संपादक) 

'हमसफर मित्र न्यूज' 





बिल्हा। विश्व आदिवासी दिवस बिल्हा स्थित पत्थरखान भाठा में आदिवासी भवन में आज धुमधाम से मनाया गया है। आदिवासी समुदाय के लोगों ने झंडा एवं बाजे गाजे के साथ नगर भ्रमण पर निकले हैं जिसमें सैकड़ों की संख्या में लोग शामिल हुए हैं। यहां से रवाना होकर बिलासपुर पुलिस ग्राउंड में कार्यक्रम प्रस्तुत करेंगे जिसमें समाज के गणमान्य नागरिक उपस्थित रहेंगे। 


ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा 9 अगस्त 1982 को आदिवासियों के हित के लिए एक बैठक का आयोजन किया था, जिसमें निर्णय लिया गया है कि प्रति वर्ष 9 अगस्त को सभी देशों में आदिवासी दिवस मनाया जाएगा। उस समय से अबतक प्रति वर्ष 9 अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस मनाया जा रहा है। 


अपने परंपरा, संस्कृति तथा जीवन शैली को समेटे अपने अलग ही एक स्वतंत्र परिचय दुनियाभर में जाहिर करने में सक्षम रहे है। आज हम बात करने वाले है दुनिया भर की ऐसी एक समुदाय के बारे में जिन्हें हम आदिवासी कहते है और जानते है ” विश्व आदिवासी दिवस ” के महत्व तथा उद्वेश्य के बारे में।


आदिवासी कौन है? 


“आदिवासी” शब्द की अगर हम व्याख्या करे तो यह “आदि” और “वासी” शब्द का सम्मलेन मालूम होता है, जिससे हमें पता लगता है कि ये वे लोग है जो किसी क्षेत्र तथा प्रदेश के सबसे शुरुआती जन समुदाय है। जिनको अंग्रेजी में indigenous कहा जाता है। ये लोग भारत समेत सभी महादेश, द्वीप समूह में मानव सभ्यता के सुरुवाती समय से रह रहे है। 


माया, ज़ेपोटेक, आदिवासी(भारत में संताल, बोरो, हो, मुंडा आदि), मसाई, हिम्बा आदि कुछ मूल निवासी है। पुराने समय से जंगल के ऊपर निर्भर तथा सुरक्षा करने वाले यह लोग घने जंगल के अंदर रहते है। जंगलेजात पदार्थ के ऊपर अपने गुजारा करते यह लोग जंगल की सुरक्षा तथा विकास को प्राथमिकता देते आये है। 


ज्यादातर आदिवासी मूल निवासी कुछ निर्दिष्ट तथा विशेष धर्म से न जुड़े प्रकृति को ही भगवान मानकर उसकी उपासना करते आये है। इसके साथ साथ अपने खुद की कला, संस्कृति और परंपरा के विकाश के साथ साथ भव्य निर्माण(मयान सभ्यता के मन्दिर एक नमूना मात्र) में भी यह उत्कृष्ट रहे है। 


प्रकृति में उपस्थित हर जीव और निर्जीव जैसे नदी, झरना, पहाड़, बृक्ष, पशु आदि के पूजा तथा संरक्षण में इनका योगदान श्रेष्ठ रहा है। बिडम्बना का विषय यह के आज ये आदिवासी लोग अपने हक़ से सुविधा से कोशो दूर है। शहरीकरण, बढ़ते आवादी के लिए नगर तथा शिल्प के विकास के साथ इनका प्राकृतिक वास में घटाव परिलक्षित होते है। 


विश्व में आदिवासियों के संख्या- 


विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ो के माने तो आज दुनिया भर में 476 मिलियन (47 करोड़ 60 लाख) से भी ज्यादा आदिवासी लोग लगभग 90 देशों में महजूद है। जो के 7000 से भी ज्यादा भाषा और 5000 से भी ज्यादा संस्कृति को समेटे हुए है। वहीं हमारे देश में 8.6% लगभग 10 करोड़ आदिवासियों की संख्या हैं। 


2022 के “विश्व आदिवासी दिवस ” का थीम –


हर साल विश्व आदिवासी दिवस पर एक थीम चुनकर उस पर काम किया जाता है। इस साल के लिए थीम है “The role of indigenous women in the preservation and transmission of traditional knowledge”. जिसका अर्थ होता है ” पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और प्रसार में आदिवासी महिलाओं के भूमिका “। 


महिलाएं समाज के वो कड़ी है जिनके बिना यह समाज बिखरने में समय नहीं लगेगा। महिलाओं के अपने परिवार और समाज के आरती निष्ठा के वजह से हम एक नए दौर में सामिल हो सकते है। 


अपने पुरखों का ज्ञान और परंपरा को महिलाएं एक पीढ़ी से दूसरे पीढ़ी तक लाते है। इस बार महिलाओं को विशेष रूप से ध्यान में रखकर उनके विकास तथा समाज के लिए उनके अवदान को स्वीकार कर साराह जाने का प्रयास हो रहा है।


विश्व आदिवासी दिवस के प्रतीक –


बांग्लादेश के एक लड़के रेवांग दीवान के द्वारा बनाई एक कला कृति को संयुक्त राष्ट्र महासंघ द्वारा प्रतिक के रूप में स्वीकार किया गया है। जिसमे एक पृत्वी जैसे ग्रह के दोनों तरफ हरे रंग के दो पत्तियों के सृंखला समान्तर से एक दूसरे के और है। ग्रह के बीच में दो अलग हाथ हैण्ड शेक करते नजर आएंगे। 


आदिवासी और पर्यावरण –


यह समूह जंगलों में रहने के साथ साथ इनके संरक्षण में भी अहम भूमिका निभाते आये है। समय समय पर प्रकृति की सुरक्षा के लिए ये कई सारे आंदोलन देश तथा दुनिया भर में करते आये है। जंगल के ऊपर निर्भर करके अपने जीवन व्यतीत करने के कारण अगर जंगल तथा पर्यावरण को हानि पहंच तो उनके आवास स्थल को भी हानि पहंच सकता है यह इन्हें बखूबी मालूम है। 


जहां हम विश्वतापन के समस्या से जूझते आ रहे है वही ये नए जंगल तथा पेड़ पौधों को लगाकर प्रकृति की सुरक्षा काफ्ट आये है। “जंगल रहेगा तो आदिवासी रहेंगे, आदिवासी रहेंगे तो जंगल रहेगा “। 


इसके तात्पर्य को समझते हुए हमें भी उनके संस्कृति और परंपरा को सम्मान देना होगा। समाज के उन्नति तथा पर्यावरण के सुरक्षा के लिए मिलजुल कर काम करने से ही हम एक सुरक्षित बातावरण का निश्चित कर सकते है। 


पुरे विश्व के साथ इस बार भी हम सब 9 अगस्त को इन आदिवासियों के सम्मान में ” विश्व आदिवासी दिवस ” का पालन करते हुए समाज तथा देश भर के लोगों में इनके बारे में जागरूकता फैलाना होगा।

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