भारत में एक साल में पांच बार मनाया जाता है नया साल
'हमसफर मित्र न्यूज'
मस्तुरीःआपको जानकर हैरानी होगी कि पहले नया साल 1 जनवरी को नहीं मनाया जाता था। 1 जनवरी को नया साल मनाने की शुरुआत 15 अक्तूबर 1582 में हुई थी। पहले नया साल कभी 25 मार्च को, तो कभी 25 दिसंबर को लोग मनाते थे। रोम के राजा नूमा पोंपिलस ने रोमन कैलेंडर में बदलाव कर दिया जिसके बाद जनवरी को साल पहला महीना माना गया।
भारत में अलग अलग प्रांतों और धर्मों के अनुसार हर कोई अपना नया साल मनाता है. पंजाब के लोग 13 अप्रैल को बैसाखी के रूप में अपना नया साल मनाते हैं और सिख धर्म को मानने वाले इसे नानकशाही कैलेंडर के अनुसार मार्च में होली के दूसरे दिन अपना नया साल मनाते हैं. जबकि जैन धर्म को मानने वाले लोग दिवाली के दूसरे दिन नया साल मनाते हैं. यह भगवान महावीर स्वामी की मोक्ष प्राप्ति के अगले दिन से शुरू होता है. जबक हिंदू कैलेंडर के अनुसार विक्रम संवत के लिए से नया साल मनाया जाता है. इसके अलावा भी कई प्रांत के अलग अलग नए साल की शुरुआत मानी जाती है.भारत में एक साल में पांच बार मनाया जाता है नया साल,
विश्वभर में नया साल मनाने का तरीका भी अलग-अलग है। सभी धर्मों में नया साल एक उत्सव की तरह अलग-अलग अंदाज में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। कोई नाच-गाकर तो कोई पूजा-अर्चना के साथ नए साल का स्वागत करता है।
दुनिया में सबसे अधिक देशों में ईसाई नव वर्ष मनाए जाने की परंपरा है। ईसाई वर्ष 1 जनवरी से शुरू होकर 31 दिसंबर तक 12 महीनों में बंटा हुआ है। हर धर्म में नववर्ष की तिथि अलग मानी गई है। खास बात यह है कि भले ही दुनिया के सभी धर्मों के रीति-रिवाज अलग-अलग हों लेकिन 1 जनवरी को सभी देशों में नए साल की धूम रहती है।
ईसाई नववर्ष 1 जनवरी से
1 जनवरी से नए साल की शुरुआत 15 अक्टूबर 1582 से हुई। इसके कैलेंडर का नाम ग्रिगोरियन कैलेंडर है। जूलियस सीजर ने ईसा पूर्व 45वें वर्ष में जूलियन कैलेंडर बनाया। तब से 1 जनवरी को नववर्ष मनाते हैं।
पारसी नववर्ष : नवरोज से
पारसी धर्म का नया वर्ष नवरोज उत्सव के रूप में मनाया जाता है। आमतौर पर 19 अगस्त को नवरोज का उत्सव मनाया जाता है।पंजाबी नववर्ष: होली से
पंजाब में नया साल वैशाखी पर्व के रूप में मनाया जाता है। जो अप्रैल में आती है। सिख नानकशाही कैलेंडर के अनुसार होली के दूसरे दिन से नए साल की शुरुआत मानी जाती है।
हिंदू नववर्ष चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से हिंदू नववर्ष का प्रारंभ चैत्र मास की शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है। इसे हिंदू नव संवत्सर या नया संवत भी कहते हैं। ऐसी मान्यता है कि भगवान ब्रह्मा ने इसी दिन से सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी। इसी दिन से विक्रम संवत के नए साल की शुरुआत होती है। अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार यह तिथि अप्रैल में आती है। इसे गुड़ी पड़वा, उगादी आदि नामों से भारत के कई क्षेत्रों में मनाया जाता है।
जैन नववर्ष
दीपावली के अगले दिन से | जैन नववर्ष दीपावली के अगले दिन से शुरू होता है। इसे वीर निर्वाण संवत भी कहा जाता है। इसी दिन से जैनी अपना नया साल मनाते हैं।
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