गुरुकुल विद्यालय में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया दिवस मनाया गया - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Tuesday, November 2, 2021



 गुरुकुल विद्यालय में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया दिवस मनाया गया 

दुजेय साहू की रिपोर्ट 

'हमसफर मित्र न्यूज' 


नवागढ़ । गुरुकुल विद्यालय नवागढ़ में छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया दिवस मनाया गया जिसमें छत्तीसगढ़ के जाने-माने और छत्तीसगढ़ के रसखान कहे जाने वाले कवि मीर अली मीर जी का आगमन हुआ साथ में छत्तीसगढ़ के सुप्रसिद्ध छंद और व्यंग्य के क्षेत्र में ख्याति प्राप्त कवि रमेश कुमार चौहान तथा हास्य रस को बिखेरने वाले मनोज श्रीवास्तव जी सम्मिलित हुए। अतिथियों द्वारा माता सरस्वती की प्रतिमा पर पूजन अर्चन करते हुए कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। गुरुकुल विद्यालय के संचालक राजेश दीवान ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए आगंतुक अतिथियों का पुष्पगुच्छ और गुलाल से सम्मान किया। काव्य पाठ की कड़ी में मनोज श्रीवास्तव ने छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी की अस्मिता को काव्य रूप में प्रदर्शित करते हुए कहा कि " तोला छत्तीसगढ़ी आथे, मुरई भाटा के सागर तोला अड़बड़ मीठाथे फेर तोला छत्तीसगढ़ी आथे।

छंदकार और व्यंग्यकार रमेश कुमार चौहान ने छत्तीसगढ़ महतारी की वंदना करते हुए कहा कि "छत्तीसगढ़ दाई के परत हो पाव ला, जेखर लुगरा छोरे, बांटे हे सुख छांव ला" कार्यक्रम की अध्यक्षता में विराजमान नगर के वरिष्ठ गौंटिया विकास दर दीवान ने कहा कि छत्तीसगढ़ राज्य को बनाने के लिए कवियों और साहित्यकारों ने भगीरथ प्रयास किया है जिसके फलस्वरूप वर्तमान छत्तीसगढ़ की परिकल्पना साकार हो पाई है। कार्यक्रम की गरिमा को बढ़ाते हुए छत्तीसगढ़ के मीर अली मीर जी ने अपनी विभिन्न रचनाओं से विद्यार्थियों और शिक्षकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपनी प्रसिद्ध रचना "नंदा जाही का रे" से श्रोताओं का दिल जीत लिया। विद्यालय के छात्र छात्राओं ने छत्तीसगढ़ी के विभिन्न पारंपरिक गीतों पर सुंदर नृत्य प्रस्तुत किया जिससे वहां पर आनंददाई वातावरण का निर्माण हुआ। समग्र रूप से एक अनूठी और नवीन परंपरा का कार्यक्रम गुरुकुल विद्यालय ने प्रस्तुत किया जो काबिले तारीफ रहा और सभी ने उस कार्यक्रम की प्रशंसा की साथ ही छत्तीसगढ़ के विलुप्तप्राय प्रतीकों का प्रदर्शनी भी विद्यालय द्वारा लगाया गया जिसमें सभी प्राचीन उपयोग होने वाले वाली वस्तुओं को रखा गया जो वर्तमान में दिखाई नहीं देते। कार्यक्रम के अंत में राजेश दीवान जी ने आभार प्रदर्शन किया एवं आगंतुकों को प्रतीक चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया।

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