पोला पर्व के अवसर पर आदर्श युवा मंच द्वारा किसानों का सम्मान
'पं. गणेशदत्त राजू तिवारी' की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'
बिलासपुरः आदर्श युवा मंच द्वारा पिछले 21 वर्ष से लगातार मनाया जा रहे हैं किसानों के सबसे बड़े पर्व पोला पर बैलों की पूजा अर्चना कर उन्हें गुड़ चना मिष्ठान का भोग लगाया गया किसानों का सम्मान किया गया लाल बहादुर शास्त्री शाला के मैदान पर आयोजित स्वर्गीय श्री श्रीचंद मनुजा ठीक है इस विधि में आयोजित बैल सजा- सज्जा प्रतियोगिता के मुख्य अतिथि महापौर श्री राम शरण यादव कार्यक्रम के अध्यक्ष श्री अरुण सिंह चौहान अध्यक्ष जिला पंचायत विशिष्ट अतिथि श्री प्रमोद नायक अध्यक्ष जिला सहकारी बैंक श्री अभय नारायण राय प्रदेश प्रवक्ता श्री अमर बाजार वरिष्ठ समाजसेवी श्री रमेश दुआ लाफ्टर क्लब श्री सुरेंद्र कश्यप अध्यक्ष किसान सेवा समिति के विशिष्ट अतिथि में संपन्न हुआ किसानों के उत्साहवर्धन हेतु लोक कला मंच मनभौरा की शानदार प्रस्तुति की गई।
मंच के अध्यक्ष महेश दुबे ने रकम का संचालन किया आभार प्रदर्शन मंच के सचिव केशव बाजपेई ने किया इस अवसर पर विशेष रूप से तरेन्द उसराठे बाटू सिंह विष्णु हिरवानी कृष्ण मुरारी दुबे नीरज सोनी अनिल गुलहरे गोविंद गुप्ता अमित शुक्ला अमित दुबे राजू अवस्थी संतोष पांडे संतोष गुप्ता विजय मनुजा हरीश मोटवानी का सहयोग सराहनीय रहा!
तेजी से बढ़ते बाजारीकरण का दुष्प्रभाव सबसे ज्याद हमारे पारंपरिक तीज-त्यौहार के साथ-साथ लोक-कला संस्कृति पर पड़ रहा है इसका सबसे बड़ा उदाहरण है कि
छत्तीसगढ के किसानो का सबसे बड़ा पर्व पोला त्यौहार लुप्त प्राय होता जा रहा है आधुनिक तरीकों से की जा रही खेती किसानी के चलते गाय बैलों का अभाव होता जा रहा है कभी किसानों की शान बनकर पोला पर्व में अपने बैलों को हाट बाजारों में घुमा कर उसके शौर्य का प्रदर्शन किया जाता था बहुत खूबसूरती के साथ बैलों को सजाया जाता था पैरों पर मोड़ा चांदी का पीठ पर सुंदर चंदनिया सिंग को चांदी से निर्मित खूबसूरत कलाकारी से सजाया संवारा जाता था हष्ट पुष्ट बालों के शौर्य के साथ मालिकों की प्रतिष्ठित एवं सम्मान जुड़ जाया करता था तेजी से विकसित होते आधुनिक करण का परिणाम सबसे ज्यादा पशुधन पर पड़ रहा है जिसके चलते खेती किसानी के लिए सबसे उपयुक्त एवं सर्वाधिक उपयोगी बैलों की जोड़ी लुप्त प्राय हो रही है!
छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना 2000 से आदर्श युवा मंच ने लुप्त हो रही इस परंपरा को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है पिछले 21 वर्षों से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा का आयोजन महज नहीं है वरन पिछले दो दशकों से लेकर आने वाली पीढ़ियों के मन में कड़ी मेहनत लगन से किए जाने वाले सबसे महत्वपूर्ण कार्य खेती किसान के प्रति मान सम्मान बना रहे उनके जीवन यापन का सबसे बड़ा साधक जो पुत्रवत सेवक बनकर किसानों के काम आने वाले इन बैल जोड़ियों के यादें अक्षुण्ण बनी रहे!



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