'सफरनामा'
भाड़े की रिक्शा चलाकर डिप्टी कलेक्टर बने टीडी मरकाम का सफरनामा-नायब तहसीलदार से लेकर तहसीलदार व डिप्टी कलेक्टर तक के सफरनामा में किया कई मुसीबतों का सामना-लेकिन बुलंद हौसले व इरादों ने आखिरकार सफलता की सीढ़ी चढ़ने में दिलाई कामयाबी
'राकेश खरे' की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'
बलरामपुर/साहीडाँड़- ग्रामीण आदिवासी किसान गोंड़ समाज में जन्मे डॉ तुलसीदास मरकाम कई संकटों से संघर्ष करते हुए आज तहसीलदार से पदोन्नत होकर कोरिया ज़िले में डिप्टी कलेक्टर के रूप में सेवा दे रहे हैं।अति पिछड़ी क्षेत्र जिला बलरामपुर ब्लाक रामचंद्रपुर के ग्राम पंचायत पिपरौल में जन्मे गोंड़ समाज से तुलसीदास मरकाम के डिप्टी कलेक्टर बनने पर ग्रामवसी एवं समाज मे खुशी की लहर दौड़ आई है।सफलता ई इस सीढ़ी तक पहुंचने श्री मरकाम ने काफी मेहनत,लगन व ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का निर्वाहन किया है साथ ही कई दुखों का पहाड़ भी हंसते हंसते पर किया।जिसका परिणाम है कि श्री मरकाम आज डिप्टी कलेक्टर बन चुके हैं।
तुलसीदास मरकाम का डिप्टी कलेक्टर तक का सफरनाम
बलरामपुर जिले में लगभग 20 किलोमीटर के अंतराल में स्थित ग्राम पंचायत पिपरौल में ही 5 वीं तक की पढ़ाई किये तुलसीदास मरकाम बचपन से ही होनहार थे,पढ़ाई में रुची होने के कारण उन्हें परिजनों ने 10 वीं तक की पढ़ाई बलरामपुर में कराया।जिसके बाद उचित शिक्षा हेतु उन्हें अम्बिकापुर दाखिल किया गया जहां इन्होंने 11 वीं से लेकर कॉलेज तक की पढ़ाई यहाँ ही पूरा किया।श्री मरकाम के परिवार की आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी जिस कारण इन्हें अपने पढ़ाई व परिवार के पालन पोषण के लिये काम की आवश्यकता थी।पैसों व पूंजी के अभाव में इन्होंने किराये में रिक्शा लेकर पढ़ाई अपना जारी रखा और रिक्शा चलते हुवे दिन रात मेहनत कर अपना व परिवारजनों का ख्याल रखा।कॉलेज की पढ़ाई पूर्ण करने के बाद इन्होंने MPW का ट्रेनिंग लिया,प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद वे BAMS की पढ़ाई हेतु नियमतः दाखिला लिया।टीडी मरकाम काफी दिनों तक बरियों के परसा भकुरा में क्लिनिक खोलकर ग्रामीणों का सेवा भी स्वास्थ के क्षेत्र में कर चुके हैं।इस दौरान MPW के पद पर पदस्थ नोकरी भी इन्होंने किया साथ ही विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखा।इस दौरान अथक प्रयास व मेहनत कर पढ़ाई अपना जारी रखा,लक्ष्य को पाने की लालसा व सफलता का जज्बा लिये इन्होंने नायब तहसीलदार के पद के लिये प्रयास किया,जिसमें सफलता भी इन्हें मिला।यहाँ वे नायब तहसीलदार के पद पर नियुक्ति पाये और मंजिल की तलाश में अपना पढ़ाई भी निरंतर जारी रखा।नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ होने के बाद कार्य के प्रति ईमानदारी व लगन से जुटे रहने के कारण इन्हें कई जिलों में कार्य का मौका मिला,इसी बीच सरकार ने इनका प्रमोशन नायब तहसीलदार से तहसीलदार के रूप में किया।नौकरी करते करते इन्होंने LLB भी पूरा किया।श्री मरकाम ने अपने जिम्मेदारी को निभाते हुए सिविल जज का तैयारी शुरू किया और अथक मेहनत व प्रयास के बाद सफलता भी इनके हाथ लग गया।अब इनका चयन सिविल जज के पद पर हो चुका है।तहसीलदार रहते इन्होंने सिविल जज की परीक्षा भी निकाल लिए लेकिन जनता के बीच समाज का सेवा का मौका नही मिलने की सोंच के कारण पदभार ग्रहण नही किये।
तुलसीदास मरकाम को राज्यपाल द्वारा CWC का बलरामपुर जिले के लिए पदेन अध्यक्ष प्रथम श्रेणी का मजिस्ट्रेट भी नियुक्त किया गया था,लेकिन मरकाम उक्त पद को त्याग पत्र देकर नायब तहसीलदार बने रहे
अब डॉ तुलसीदास मरकाम बैकुंठपुर जिले में डिप्टी कलेक्टर का दायित्व निभा रहे हैं।श्री मरकाम कभी झुगी झोपड़ी में रहकर और भाड़े में लेकर रिक्शा चलाकर दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्र पिपरौल और आदिवासी गोंड़ समाज से संघर्ष करते हुए डिप्टी कलेक्टर पदोन्नत होने पर पूरे गोंड़ समाज मे खुशियों का माहौल है।

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