9 और 10 जुलाई में रहेगी अमावस्या, पितरों के तर्पण के साथ दान- तीर्थ स्नान करने से मिलेगा मनवांछित फल
【ज्योतिषाचार्य - पं. गणेशदत्त राजू तिवारी】
'हमसफर मित्र न्यूज'
============================
वर्षा ऋतु में आषाढ़ अमावस्या हर साल अच्छी फसल की उम्मीद बंधाती है, इस कारण यह हलहरिणी अमावस्या भी कही जाती है, इस अमावस्या पर तर्पण से पितृ प्रसन्न होते हैं और खेतिहरों के बीच हल-खेती उपकरणों के पूजन का विशेष महत्व है ,हिन्दू पंचाग में यह दिन अत्यन्त महत्वपूर्ण माना गया है, इस दिन व्रत भी मनोवांछित फलदायक होता है, आषाढ़ अंत से बरसात शुरू हो जाती है, इस माह में चतुर्मास की शुरुआत होती है, इसलिए आषाढ़ अमावस्या पर तर्पण-व्रत का विशेष विधान है, इस दिन पवित्र नदियों में स्नान कर सूर्य को अर्ध्य दिया जाता है, आषाढ़ अमावस्या पर दान-पुण्य, स्नान और पितृ तर्पण से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है, यूं तो अमावस्या तिथि हर महीने कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि को होती है लेकिन हिन्दी पंचाग के चौथे माह यानी आषाढ़ में पडऩे वाली इस तिथि को विशेष रूप से पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण और स्नान-दान के लिए उत्तम माना गया है, अमावस्या की शाम पीपल पेड़ के नीचे सरसों तेल का दीया जलाकर पितरों को स्मरण करना चाहिए।
आषाढ़ अमावस्या पर इन कार्यों से मिलेगा लाभ
१:-इस दिन भूखे प्राणियों को भोजन कराने का विशेष फल मिलता है।
२:-रुद्राभिषेक, पितृदोष शांति पूजन, शनि उपाय से कष्ट खत्म होते हैं।
३:- मछलियों को आटा गोलियां, चीटियों को पंजीरी खिलाना शुभ होगा।
४:-समृद्धि के लिए लाल धागे की बत्ती घी में जलाकर ईशान कोण पर रखें।
अमावस्या का शुभ मुहूर्त
आषाढ़ मास की अमास्या तिथि 9 जुलाई की सुबह 5 बजकर 16 मिनट से 10 जुलाई की सुबह 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगी, अमावस्या व्रत नियमानुसार 9 जुलाई को होगा, जिसका पारण 10 जुलाई को होगा।


No comments:
Post a Comment