राज्य में 13,517 मौतों में से 70 प्रतिशत 45 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के नागरिक
'हमसफर मित्र न्यूज'
रायपुर । कोरोना वायरस 45 साल से अधिक आयुवर्ग के नागरिकों के लिए सबसे ज्यादा घातक साबित हुआ है। राज्य में 13,517 मौतों में से 70 प्रतिशत मौतें इसी आयुवर्ग के नागरिकों की हुई। स्वाभाविक है कोरोना के प्रति इनमें डर तो है ही, साथ ही इनमें वैक्सीन प्रति जागरुकता भी दिखी है। राज्य में 45 से अधिक आयुवर्ग के नागरिकों की कुल संख्या 58,66,599 है। इनमें से 87 प्रतिशत ने वैक्सीन का पहला डोज लगवा लिया है तो 28 प्रतिशत ने दूसरा भी। अगर, वैक्सीन की उपलब्धता रहती है तो संभव है कि आने वाले 2-3 महीनों में दोनों डोज लगवाने वालों का प्रतिशत 50 से अधिक जा पहुंचेगा, जो इन्हें सुरक्षित करेगा।
पड़ताल में सामने आया कि 21 जून के बाद से राज्य में टीकाकरण की रफ्तार पहले की तुलना में बढ़ी है, मगर सच यह भी है टीकाकरण के ग्राफ में कि उतार-चढ़ाव भी जारी है। इस दरमियान सबसे ज्यादा टीके 45 से अधिक आयुवर्ग वालों को लगे। युवाओं भी बड़ी संख्या में घरों से निकले। बहरहाल मंगलवार को, शाम 7 बजे तक 36,581 लोगों को टीका लग चुका है। अब तक 1.17 करोड़ डोज लग चुके हैं।
परिवार के प्रति जिम्मेदारी निभा रहे लोग
45 से अधिक आयुवर्ग के नागरिक खुद के टीकाकरण से परिवार को सुरक्षित कर सकते हैं। क्योंकि इस आयुवर्ग के अधिकांश लोग शासकीय दफ्तरों और अन्य संस्थानों में नौकरीपेशा होता है। लंबे समय तक घर से बाहर रहते हैं। सैंकड़ों लोगों के संपर्क में आते हैं। ऐसे में टीकाकरण से ही बचाव है।
29 प्रतिशत युवाओं को ही लग पाया टीका
प्रदेश में युवाओं का टीकाकरण बड़ी चुनौती बना हुआ है। अभी तक 1.35 करोड़ की आबादी वाले 18 से 44 आयुवर्ग के नागरिकों में से सिर्फ 29 प्रतिशत को पहला और 0.9 प्रतिशत को ही दूसरा डोज लग पाया है। दूसरी लहर में इस आयुवर्ग के नागरिक अपनी लापरवाही के चलते बड़ी संख्या में संक्रमित हुए। ये कोरोना के वाहक बने। इनके चलते परिवार के कई लोग संक्रमित हुए और जानें भी गईं।
मृतकों में पाई गई बीमारियां
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हायपर टेंशन, अस्थमा, कैंसर, हार्ट, किडनी, लिवर संबंधी रोग मृतकों में पहले से थे। जिसे कोमॉबिडिटी कहा जाता है। आंबेडकर अस्पताल के टीबी एंड चेस्ट रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आरके पंडा कहते हैं कि बीमार व्यक्तियों में रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होती है। यही वजह है कि कोरोना जब उन पर अटैक करता है तो स्वस्थ होने में समय लगता है। कई बार जान भी नहीं बच पाती। सावधानी ही बचाव है। अभी भी जो लोग संक्रमित मिल रहे हैं, उनमें 45 से अधिक उम्र वालों ही अधिक मिल रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग महामारी नियंत्रण कार्यक्रम के प्रवक्ता एवं संचालक डॉ. सुभाष मिश्रा ने कहा, कोरोना का डर तो है ही, मगर जिम्मेदारी भी है। इस उम्र के लोग अपने परिवार के प्रति सर्वाधिक जिम्मेदार माने जाते हैं। उम्र के इस पड़ाव में बीमारियां भी घर करती हैं, इसलिए टीकाकरण है बचाव है।
'जिओ न्यूज' से साभार

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