बालिका गृह में रहकर हुईं बालिग, दोनों की करवाई शादी
6 साल पहले दोनों को लाया था बालिका गृह, सुमति सामुदायिक विकास संरक्षण संस्था ने की पहल
पं. गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'
कोरबा। सामाजिक व पारिवारिक कारणों से अपनों की छाया से दूर हुईं भारती व धीमा का घर संसार रविवार को बस गया। 6 साल से बालिका गृह डिंगापुर में रह रहीं थीं। 20 साल की दोनों बालिकाओं का विवाह रीति-रिवाज के साथ कराया गया। रविवार को बालिका गृह में कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए वैदिक रीति से अग्नि के सात फेरे लेते हुए परिणय-सूत्र में बंध गईं।
बालिका गृह की संचालिका रुकमणी नायर ने बताया कि बालिकाओं की जानकारी गोपनीय रखी जाती है, इसलिए उनके अतीत को हम नहीं बता सकते, लेकिन उनके सुनहरे भविष्य के लिए उनकी अनुमति पर गृहस्थ जीवन में प्रवेश कराया गया है। कानूनी रूप से न्यायालय की अनुमति पर बालिकाओं को बालिका गृह में संरक्षण दिया गया था। सिंचाई कालोनी रामपुर, कोरबा निवासी सुनील व बिलासपुर निवासी रोहित की शादी में युवकों के परिजनों के साथ महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी, कर्मचारी शामिल हुए। विवाह सूत्र में बंधने के बाद संस्था से बेटियों की तरह उपहार देकर विदाई की गई।
विवाह के लिए संस्था ने इस तरह की वर की तलाश
बालिका गृह में पोषित व शिक्षित होने वाली नाबालिग जब बालिग होती हैं, तो उनकी काउंसिलिंग की जाती है, क्योंकि बालिग होने के बाद उन्हें बालिका गृह में रखने की अनुमति नहीं होती। काउंसिलिंग में दोनों बालिकाओं ने शादी करने की अनुमति दीं। सहमति मिलने पर महिला व बाल विकास विभाग की अनुमति ली गई। इसके बाद लड़कियों के लिए वर की तलाश शुरू की। जिन लड़कों ने आवेदन किया, उनका पुलिस वेरिफिकेशन, शपथ-पत्र आदि कानूनी प्रक्रिया पूरी कर वैदिक रूप से शादी कराई गई।
रोहित की राशन दुकान, सुनील इलेक्ट्रिशियन
डिंगापुर स्थित बालिका गृह (सुमति सामुदायिक विकास संरक्षण संस्था) की प्रमुख रुकमणी नायर ने बताया बिलासपुर निवासी रोहित की शादी भारती से हुई है। उसकी अपनी राशन की दुकान है, जबकि सिंचाई काॅलोनी रामपुर निवासी सुनील इलेक्ट्रिशियन है। उसके साथ धीमा की शादी कराई गई। दोनों स्वरोजगार से जुड़े हैं। इसलिए दोनों अपने जीवन की गाड़ी खींचने में सक्षम हैं।


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