इस बार के महाशिवरात्रि में कुछ हैं खास, जानें क्या... - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Wednesday, March 10, 2021

 

इस बार के महाशिवरात्रि में कुछ हैं खास , जानें क्या... 

'हमसफर मित्र न्यूज'। 


महाशिवरात्रि की तिथि

महाशिवरात्रि इस बार 11 मार्च 2021 को गुरुवार के दिन मनाया जाएगा और इसी दिन इसका व्रत भी रखा जाएगा। पौराणिक कथाओं में बताया गया है कि इस दिन शिव और शक्ति के मिलन का दिन है, यानि शिव पार्वती विवाह इसी दिन हुआ था।

बेहद शुभ योग में इस बार शिवरात्रि

इस साल शिवरात्रि का त्‍योहार बेहद खास योग में मनाया जा रहा है। इस दिन शिव योग लगा रहेगा और साथ ही नक्षत्र घनिष्‍ठा रहेगा और चंद्रमा मकर राशि में रहेगा। इसलिए इस बार की महाशिवरात्रि बेहद खास मानी जा रही है। इस साल शिवरात्रि की पूजा संपूर्ण विधि विधान के साथ करने से आपकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होंगी।

पूजा का शुभ मुहूर्त…

महाशिवरात्रि त्रयोदशी तिथि- 11 मार्च 2021(गुरुवार

चतुर्दशी तिथि प्रारंभ– 11 मार्च, दोपहर 2 बजकर 39 मिनट पर शुरू होगी

चतुर्दशी तिथि समाप्त– 12 मार्च, दोपहर 12 बजकर 23 मिनट पर

महाशिवरात्रि के व्रत का आरंभ इस बार त्रयोदशी तिथि में होगा। इस दिन जल्‍दी उठकर स्‍नान कर लें और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और पूजा वाले स्‍थान की अच्‍छे से सफाई करवाएं।

भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को लकड़ी की चौकी पर स्‍थापित करें और पंचामृत से स्‍नान करवाएं।

शिवलिंग को भी स्‍नान करवाकर बेलपत्र,भांग, धतूरा, फल और मिठाई का भोग लगाएं।

शिवजी को चंदन का तिलक लगाकर पूजा करें और माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं।

सच्‍चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत करने का संकल्‍प करें और मंदिर जाकर शिवजी को जल चढ़ाएं।

महाशिवरात्रि के व्रत का आरंभ इस बार त्रयोदशी तिथि में होगा। इस दिन जल्‍दी उठकर स्‍नान कर लें और स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें और पूजा वाले स्‍थान की अच्‍छे से सफाई करवाएं।

भगवान शिव और माता पार्वती की प्रतिमा को लकड़ी की चौकी पर स्‍थापित करें और पंचामृत से स्‍नान करवाएं।

शिवलिंग को भी स्‍नान करवाकर बेलपत्र,भांग, धतूरा, फल और मिठाई का भोग लगाएं।

शिवजी को चंदन का तिलक लगाकर पूजा करें और माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं।

सच्‍चे मन से महाशिवरात्रि का व्रत करने का संकल्‍प करें और मंदिर जाकर शिवजी को जल चढ़ाएं।

शिव पुराण के अनुसार, महाशिवरात्रि पूजा में छह वस्तुओं को अवश्य शामिल करना चाहिए:

शिव लिंग का पानी, दूध और शहद के साथ अभिषेक। बेर  या बेल के पत्ते जो आत्मा की शुद्धि का प्रतिनिधित्व करते हैं;

सिंदूर का पेस्ट स्नान के बाद शिव लिंग को लगाया जाता है। यह पुण्य का प्रतिनिधित्व करता है;

फल, जो दीर्घायु और इच्छाओं की संतुष्टि को दर्शाते हैं;

जलती धूप, धन, उपज (अनाज);

दीपक जो ज्ञान की प्राप्ति के लिए अनुकूल है;

और पान के पत्ते जो सांसारिक सुखों के साथ संतोष अंकन करते हैं।

अभिषेक में निम्न वस्तुओं का प्रयोग नहीं किया जाता है:

तुलसी के पत्ते

हल्दी

चंपा और केतकी के फूल

ज्योतिर्लिंग

बारह ज्योतिर्लिंग जो पूजा के लिए भगवान शिव के पवित्र धार्मिक स्थल और केंद्र हैं। वे स्वयम्भू के रूप में जाने जाते हैं, जिसका अर्थ है "स्वयं उत्पन्न"। बारह स्‍थानों पर बारह ज्‍योर्तिलिंग स्‍थापित हैं।

1. सोमनाथ यह शिवलिंग गुजरात के काठियावाड़ में स्थापित है।

2. श्री शैल मल्लिकार्जुन मद्रास में कृष्णा नदी के किनारे पर्वत पर स्थापित है श्री शैल मल्लिकार्जुन शिवलिंग।

3. महाकाल उज्जैन के अवंति नगर में स्थापित महाकालेश्वर शिवलिंग, जहां शिवजी ने दैत्यों का नाश किया था।

4. ॐकारेश्वर मध्यप्रदेश के धार्मिक स्थल ओंकारेश्वर में नर्मदा तट पर पर्वतराज विंध्य की कठोर तपस्या से खुश होकर वरदाने देने हुए यहां प्रकट हुए थे शिवजी। जहां ममलेश्वर ज्योतिर्लिंग स्थापित हो गया।

5. नागेश्वर गुजरात के द्वारकाधाम के निकट स्थापित नागेश्वर ज्योतिर्लिंग।

6. बैजनाथ बिहार के बैद्यनाथ धाम में स्थापित शिवलिंग।

7. भीमाशंकर महाराष्ट्र की भीमा नदी के किनारे स्थापित भीमशंकर ज्योतिर्लिंग।

8. त्र्यंम्बकेश्वर नासिक (महाराष्ट्र) से 25 किलोमीटर दूर त्र्यंम्बकेश्वर में स्थापित ज्योतिर्लिंग।

9. घुमेश्वर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में एलोरा गुफा के समीप वेसल गांव में स्थापित घुमेश्वर ज्योतिर्लिंग।

10. केदारनाथ हिमालय का दुर्गम केदारनाथ ज्योतिर्लिंग। हरिद्वार से 150 पर मिल दूरी पर स्थित है।

11. काशी विश्वनाथ बनारस के काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग।

12. रामेश्वरम्‌ त्रिचनापल्ली (मद्रास) समुद्र तट पर भगवान श्रीराम द्वारा स्थापित रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग।




पंडित गणेशदत्त राजू तिवारी मल्हार जिलाध्यक्ष 
विश्व ब्राह्मण महापरिषद बिलासपुर छग.।
9098571220/9977701806

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