देव नगरी मल्हार पातालेश्वर महादेव मंदिर में हाेगा शिवरात्रि पर्व में जागरण,जलाभिषेक इस अवसर पर लगेंगे 15 दिवसीय मेला।
11 मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर पातालेश्वर मंदिर मल्हार में लगेगी शिव भक्ताें की भीड़, मंदिराें में हुई आकर्षक विद्युत साज सज्जा...
'हमसफर मित्र न्यूज'।
ऋषि-मुनियों की तपो भूमि कहे जाने वाले भारतभूमि में कई सारे शिव मंदिर ऐसे हैं, जो लोगों की आस्था का विशेष केंद्र हैं। इनमें से कई शिवालय तो ऐसे हैं, जाे 500 सालों तक का इतिहास खुद में सहेजे हुए हैं। 11 मार्च को महाशिवरात्रि के अवसर पर मल्हार नगर पंचायत के पातालेश्वर महादेव मंदिर में भोले के भक्तों का मेला लगेगा। शिवरात्रि के लिए मंदिर में आकर्षक विद्युत साज सज्जा की गई है। साथ ही मंदिराें में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुआें के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुबह से ही शिवजी का अभिषेक कर बेलपत्र चढ़ाने व विशेष पूजा अर्चना करने वालों की कतार लग जाएगी। सभी शिवालय बम-बम भोले के जयकारों से गूंज उठेंगे। मल्हार नगर के प्रसिद्ध परमेश्वरा तालाब से जल भरकर प्रथम अभिषेक पंडित ताराचंद अवस्थी द्वारा किया जाता है।वहीं गंगा आदि पवित्र नदियों से जल लेकर आए कांवड़िये भी भगवान शिव पर जल चढ़ाएंगे। शिवरात्रि पर रात्रि बारह बजे से पातालेश्वर महादेव मंदिर में भगवान शिव की जलाभिषेक शुरू हो जाएगी, जाे इसके बाद लगातार निरंतर चलता रहेगा। धार्मिक स्थलों पर कोविड गाइडलाइन का होगा पालन,मास्क-सैनिटाइजर भी जरूरी
व्यवस्थाः महाशिवरात्रि के अवसर पर पातालेश्वर मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। कोरोना को ध्यान में रखते हुए बुजुर्ग व बच्चों के साथ ही बीमार भक्तों से घर में रहकर ही भगवान की भक्ति करने की अपील की गई है। पातालेश्वर महादेव की पिंडी को छूना पूर्णत: प्रतिबंधित रहेगा। मास्क लगाकर ही मंदिर में प्रवेश दिया जाएगा। भगवान को दूध, गंगाजल, बेल-पत्री दूर से ही अर्पित करें।
एक बार में हजार बार की पूजा का फल देते हैं पातालेश्वर मान्यता है कि कि पातालेश्वर महादेव के दर्शन करने पर एक हजार शिवलिंग के दर्शन होते हैं। एक बेलपत्र व एक लोटा गंगाजल चढ़ाने से एक हजार बार की पूजा का फल मिलता है।



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