बारदाने की कमी से नहीं हो पा रहा हैं धान की उठाव - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Tuesday, January 12, 2021



बारदाने की कमी से नहीं हो पा रहा हैं धान की उठाव 

मस्तूरी से गणेशदत्त राजू तिवारी की रिपोर्ट 

'हमसफर मित्र न्यूज'। 


 मस्तुरी क्षेत्र के अंतर्गत धान खरीदी केंद्रों में इन दिनों किसानों के साथ समिति प्रबंधक भी परेशान हैं। खरीदी केंद्रों में बारदाने की कमी और किसानों से खरीदी की गई 13 लाख 45 हजार क्विंटल धान का उठाव नहीं होने के कारण रखने की समस्या शुरू हो गई है। कई जगहों में खरीदी बंद हो गई है।

मस्तुरी के अंतर्गत 34 धान खरीदी केंद्रों में धान खरीदा की जा रही है।धान उठाव नही होने के चलते खरीदी केंद्रों में धान जाम है। और किसानों के आने वाले धान रखने के लिए जगह नही है।  मस्तुरी शाखा के अंतर्गत ऐसे अनेक धान खरीदी केंद्र हैं जहां 25 से 30 प्रतिशत ही उठाव हो पाया है। इसके चलते हजारों क्विंटल धान जाम हो जाने के कारण खरीदी बंद कर दी गई है।

धान उठाव नही होने के कारण सैकड़ों क्विंटल धान बाहर पडे पडे सुग रहे हैं।साथ हु धान के लगे लाटो को ढकने के लिए किसी प्रकार की व्वस्था नही होने के कारण धान संग्रहण केन्द्रों नुकसान होते साफ साफ दिखाई दे रहा है। जिससे सेवा सहकारी समिति को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। खरीदी केंद्र कई कई जगह कुछ इसी प्रकार की समस्या है। जहां उठाव नहीं होने के कारण धान खरीदी केंद्र में जाम है। इसके चलते आने वाले धान को रखने के लिए जगह नहीं है। परेशानी देखकर खरीदी बंद कर दी गई है। मस्तुरी क्षेत्र मे लगभग34धान उपार्जन केंद्र बनाया गया है जहां उठाव नहीं हो पा रहा है। इससे किसान एवं समिति के कर्मचारियों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों के बारदाने के भरोसे खरीदी इस बार बारदाने की समस्या धान खरीदी के प्रथम सप्ताह से ही है। धान खरीदी केंद्रों में बारदाने नहीं होने के कारण कई बार खरीदी बंद करनी पड़ रही है। परंतु अब शासन के नए गाइडलाइन के चलते किसानों के बारदाने से ही खरीदी की जा रही है। किसानों के बारदाने के ऐवज में हालांकि 15 रुपए प्रति बारदाने किसानों को दिया जा रहा है जबकि किसानों को 25-30 रुपए में बाजार से बारदाना खरीदना पड़ रहा है। अभी अधिकांश खरीदी केंद्रों में केवल किसानों के बारदाने के भरोसे खरीदी की जा रही है। मजबूरी में किसान अपनी फसल बेचने के लिए बाजार से अधिक मूल्य में बारदाने खरीदी कर अपनी फसल बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं।

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