आज 'सोमवती अमावस्या', जानिए क्या है महत्व - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Monday, July 20, 2020


सोमवती अमावस्या स्पेशल-


लेखक - पं. गणेशदत्त राजू तिवारी, मल्हार। 

'हमसफर मित्र'। सोमवार 20 जुलाई।    सोमवार का दिन भगवान शिव की पूजा और उपासना को समर्पित होता है, इसलिए सोमवती अमावस्‍या पर दान पुण्‍य के साथ शिवजी की पूजा का विशेष महत्‍व होता है | इस दिन सूर्य और चंद्रमा एक सीध में होते हैं, इसलिए यह पर्व विशेष पुण्‍यदायी माना जाता है | सुहागिन महिलाएं अपने पति की दीर्घायु की कामना के लिए व्रत भी रखती हैं | इस दिन पीपल के वृक्ष में शिवजी का वास मानकर उसकी पूजा और परिक्रमा भी की जाती है |

   सोमवती अमावस्या की कथा...........एक गरीब ब्रह्मण परिवार था, जिसमे पति, पत्नी के अलावा एक पुत्री भी थी | पुत्री धीरे धीरे बड़ी होने लगी | उस लड़की में समय के साथ सभी स्त्रियोचित गुणों का विकास हो रहा था | लड़की सुन्दर, संस्कारवान एवं गुणवान भी थी, लेकिन गरीब होने के कारण उसका विवाह नहीं हो पा रहा था | एक दिन ब्रह्मण के घर एक साधू पधारे, जो कि कन्या के सेवाभाव से काफी प्रसन्न हुए | कन्या को लम्बी आयु का आशीर्वाद देते हुए साधू ने कहा की कन्या के हथेली में विवाह योग्य रेखा नहीं है | ब्राह्मण दम्पति ने साधू से उपाय पूछा कि कन्या ऐसा क्या करे की उसके हाथ में विवाह योग बन जाए | साधू ने कुछ देर विचार करने के बाद अपनी अंतर्दृष्टि से ध्यान करके बताया कि कुछ दूरी पर एक गाँव में सोना नाम की धोबिन जाति की एक महिला अपने बेटे और बहू के साथ रहती है | जो की बहुत ही आचार- विचार और संस्कार संपन्न तथा पति परायण है | यदि यह कन्या उसकी सेवा करे और वह महिला इसकी शादी में अपने मांग का सिन्दूर लगा दे, उसके बाद इस कन्या का विवाह हो तो इस कन्या का वैधव्य योग मिट सकता है | साधू ने यह भी बताया कि वह महिला कहीं आती जाती नहीं है | यह बात सुनकर ब्रह्मणि ने अपनी बेटी से धोबिन कि सेवा करने कि बात कही |

   अगल दिन कन्या प्रात: काल ही उठ कर सोना धोबिन के घर जाकर, साफ-सफाई और अन्य सारे करके अपने घर वापस आ जाती | सोना धोबिन अपनी बहू से पूछती है कि तुम तो तडके ही उठकर सारे काम कर लेती हो और पता भी नहीं चलता | बहू ने कहा कि माँ जी मैंने तो सोचा कि आप ही सुबह उठकर सारे काम ख़ुद ही ख़तम कर लेती हैं | मैं तो देर से उठती हूँ | इस पर दोनों सास बहू निगरानी करने करने लगी कि कौन है जो सुबह ही घर का सारा काम करके चला जाता है | कई दिनों के बाद धोबिन ने देखा कि एक एक कन्या मुँह अंधेरे घर में आती है और सारे काम करने के बाद चली जाती है | जब वह जाने लगी तो सोना धोबिन उसके पैरों पर गिर पड़ी, पूछने लगी कि आप कौन है और इस तरह छुपकर मेरे घर की चाकरी क्यों करती हैं | तब कन्या ने साधू द्बारा कही गई सारी बात बताई | सोना धोबिन पति परायण थी, उसमें तेज था, वह तैयार हो गई | सोना धोबिन के पति थोड़ा अस्वस्थ थे | उसमे अपनी बहू से अपने लौट आने तक घर पर ही रहने को कहा | सोना धोबिन ने जैसे ही अपने मांग का सिन्दूर कन्या की मांग में लगाया, उसके पति मर गया | उसे इस बात का पता चल गया | वह घर से निराजल ही चली थी, यह सोचकर की रास्ते में कहीं पीपल का पेड़ मिलेगा तो उसे भँवरी देकर और उसकी परिक्रमा करके ही जल ग्रहण करेगी | उस दिन सोमवती अमावस्या थी | ब्रह्मण के घर मिले पूए- पकवान की जगह उसने ईंट के टुकडों से 108 बार भँवरी देकर 108 बार पीपल के पेड़ की परिक्रमा की और उसके बाद जल ग्रहण किया | ऐसा करते ही उसके पति के मुर्दा शरीर में वापस जान आ गई | धोबिन का पति वापस जीवित हो उठा |

   कुछ समय बाद ब्राह्मण की कन्या का अच्छी जगह विवाह हो जाता है, और वह अपने पति के साथ सुखमय जीवन व्यतीत करने लगती है | इसके बाद से इस दिन का हर विवाहिता के जीवन में विशेष महत्व है, वे अपने पति की लम्बी आयु के लिए प्राथना करती है |

पंडित गणेशदत्त राजू तिवारी जिलाध्यक्ष विश्व ब्राह्मण महापरिषद संगठन बिलासपुर छत्तीसगढ़।

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