जानिए श्रावण शिवरात्रि का विशेष महत्व - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Sunday, July 19, 2020


श्रावण शिवरात्रि का महत्व 

लेखक - पं. गणेशदत्त राजू तिवारी, मल्हार। 

'हमसफर मित्र'। 

आज भगवान भोलेनाथ की श्रावण शिवरात्रि  है शिवरात्रि भगवान शिव को समर्पित त्यौहार है। इस दौरान भगवान शिव, माता पार्वती, नंदी, गणेश भगवान, कार्तिकेय भगवान की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। सावन शिवरात्रि का दिन कांवड़ यात्रा का समापन दिन भी माना जाता है।

   हर महीने कृष्ण पक्ष के 14वें दिन को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इसमें भी फाल्गुन और श्रावण मास की शिवरात्रि को विशेष फलदायी माना जाता है। 
 सवान मास में इस शिवरात्रि का विशेष महत्व माना गया है। सावन मास में शिव की पूजा करने से बाधाएं समाप्त होती है और जीवन में सुख समृद्धि आती है।

   मान्यता है कि चातुर्मास में भगवान शिव पृथ्वी का भ्रमण करते हैं और अपने भक्तों की खबर लेते हैं। उनके कष्टों को दूर करते हैं और अपना आर्शीवाद प्रदान करते हैं। इसलिए सावन में पड़ने वाले सोमवार पर भगवान शिव की विशेष पूजा की जाती है।

 शिवरात्रि का महत्व

   सावन में मासिक शिवरात्रि का महत्व महाशिवरात्रि के महत्व से कम नहीं है। इस शिवरात्रि पर विधि पूर्वक भगवान शिव की पूजा करने से जीवन में शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन व्रत का संकल्प लेकर भगवान शिव की पूजा की जाती है।

   मासिक शिवरात्रि का व्रत रखने से नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है, क्योंकि इस व्रत में व्यक्ति को अपने अवगुणों का त्याग करना होता है। शिव ही सत्य है, इसलिए जो व्यक्ति बुराई, लालच, और गलत कामों से दूर रहता है उसे भगवान शिव का आर्शीवाद प्राप्त होता है।

   भगवान शिव का सबसे पवित्र दिन शिवरात्रि, भगवान शिव की प्रसन्नता हासिल करने के साथ-साथ, सकारात्मक उर्जा का एक सर्वश्रेष्ठ श्रोत माना गया है। कहा जाता है कि इस दिन की पूजा करने से, भगवान शिव पर जलाभिषेक या रुद्राभिषेक करने मात्र से जीवन में शांति आती है, और कितनी भी कठिन राहें हो वो आसान लगने लग जाती है। इसके अलावा शिवरात्रि का व्रत-पूजन करने से मनचाहा वर भी मिलता है और समस्त मनोकामनाएं भी अवश्य पूरी होती हैं।

इन मंत्रों का करें प्रयोग...
नमः शिवायः, ॐ नमः शिवायः।।
ॐ नमः शिवायः।।
बोल बम, बम बम, बम बम भोले।।
हर हर महादेव।।

    इसके बाद व्रत करना हो तो पूजा-व्रत का संकल्प लें।
फिर घर के मंदिर में शिवलिंग पर पंचामृत चढ़ाएं। (दूध, दही, शहद, घी और गन्‍ने का रस या चीनी का मिश्रण से पंचामृत बनाएं) श्रद्धा के साथ अभिषेक करें।

   इसके बाद ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप करते हुए शिवलिंग पर बेलपत्र, फल, फूल इत्यादि अर्पित करें।
शिव चालीसा का पाठ करें या सुनें, और अंत में घर के सभी लोग मिलकर भगवान की आरती करें।

    जब मनुष्य पर हर ओर से संकट आ जाता है और जीवन में अधंकार छा जाता है तो शिवभक्ति रूपी नैया से सभी बाधाएं और कष्ट मिटते हैं। सुखद जीवन के लिए आप भी भोलेभंडारी की शरण में जाएं।

पंडित गणेशदत्त राजू तिवारी जिलाध्यक्ष विश्व ब्राह्मण महापरिषद संगठन बिलासपुर मल्हार🙏🏻

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