रामचरित मानस - भाग 4, शिव-पार्वती का कथा वाचन - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Tuesday, July 28, 2020

रामचरित मानस भाग - 4, शिव-पार्वती का कथा वाचन 


पं. प्रदुम्न जी महाराज, मुढ़ीपार, बिल्हा ।

'हमसफर मित्र'। 

,,,,जय श्री राम ,,,,  कथा जो सकल लोक हितकारी,,  सोई पूछन चह शैल कुमारी,,,, बाल काण्ड  दोहा न 106  चौपाई न 3 आज माता पार्वती जी सारे  लोक  की हित करने वाली कथा पूछी  शंकर जी ने कहा  तुम अपने हित कि बात करो पार्वती जी ने कहा  महराज यदि आप केवल मेरे नाथ होते तो अपने हित की बात करती आप  तो मेरे नाथ नही है  ,,बाल कांड दोहा 106  ,, विश्व नाथ मम नाथ पुरारी ,, त्रिभुवन महिमा विदित तुम्हारी ,,,, आप तो विश्व के नाथ है  इसीलिये जो भी कथा आपके द्वारा होगी विश्व के हित के लिये होगी कृपया करके आप ओ  अमर कथा सुना दे जिससे सारे लोको का हित हो शंकर जी ने  कथा बाद में सुनाई  आप रामचरित्र पढ़ेंगे तो  पता चलेगासबसे पहले पार्वती जी को धन्यवाद दिया   ,,, धन्य धन्य गिरी राज कुमारी ,, तुम समान नही कोउ उपकारी   ,, बालकाण्ड दोहा न 111  चौपाई  न 3 ,,, तुम धन्य हो देवी   तुम्हारे माता पिता धन्य हो  जो ऐसी बेटी को जन्म दिया पार्वती जी ने कहा महराज  मैंने  किया क्या है  शंकर जी ने कहा सुनो पार्वती  तू ने ,, पूछेहू रघुपति कथा प्रसंगा ,, सकल लोक जग पावनी गंगा ,, संकर जी  ने कहा आज तूने  गंगा का प्रादुर्भाव किया  है  पार्वती जी ने कहा  ये गंगा तो आपके सिर पर पहले से विराजमान है  पहले से बह रही है  बड़ाई की क्या बात है  शंकर जी ने कहा दोनो में बड़ा अंतर है  संकर जी ने कहा मेरे सिर पर जो गंगा में स्नान करते है  उसका  जन्म जन्मांतर युगयुगान्तर कल्पकल्पान्तर का पाप  धुल कर नष्ट हो सकता है  लेकिन पाप करने की प्रवित्ति नही धुलती अगर पाप करने की प्रवित्ति गंगा में  धुलती तो   गंगा जी के किनारे घूमने वाले  चोर नही होते  उनकी वृति कब की बदल गयी होती  शंकर जी ने कहा पार्वती  कथा रुपी गंगा में एक बार डुबकी लगायेगा  उसके पाप करने की प्रवति  बदल जाएगी  ओ पाप करना छोड़ दे गा  उनके विचारो  में परिवर्तन  होने लगेगा  जब  विचार बदल जाते है  तो जीवन बदल जाता है  ।

 ,,, जय श्री राम राधे राधे पंड़ित श्री प्रदुम्न जी महराज ९९२६२७३७७२ 🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻

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