अगर आप भी है सिगरेट के शौकीन तो इसे जरुर पढ़ें - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Saturday, May 23, 2020


अगर आप भी है सिगरेट के शौकीन तो इसे जरुर पढ़ें


लेखक - निलेश सिंह सिसोदिया


   सिगरेट पीना केवल अपने आप को ही नुकसान पहुंचाना ऐसा नहीं है। बल्कि सिगरेट के धुएं से वातावरण दूषित होता है, जिससे आसपास के प्राणियों में भी इसका असर पड़ता है।

   सिगरेट का धुंआ एक्टिव स्मोकर से ज्यादा पैसिव स्मोकर के लिए हानिकारक होता है और सिगरेट पीने से समाज में बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है।

   स्मोकिंग करने वाले लोग अक्सर ऐसा सोचते हैं कि वह सिर्फ खुद को हानी पहुंचा रहें है परंतु उन्हे ये नहीं पता कि वे अपने साथ साथ पूरे समाज को नुकसान दे रहें हैं। सिगरेट का धुंआ एक्टिव स्मोकर से ज्यादा पैसिव स्मोकर के लिए हानिकारक होता है और सिगरेट पीने से समाज में बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है। स्मोकिंग करने वाले लोग शारिरिक बिमारियों के साथ साथ मानसिक बिमीरियों का भी शिकार होते चले जाते हैं।

कैसे करता है निकोटिन दिमाग पर असर :- 


   सिगरेट में मिलने वाले निकोटिन का असर सीधा हमारे दिमाग पर होता है। आमतौर पर हर व्यक्ति स्मोकिंग करने की शुरूआत सिर्फ शौक के तौर पर करता है और वो ये सोचता है कि उसे इसकी आदत नहीं लग सकती पर कब वे स्मोकिंग करने का आदी बन जाता है उसे खुद पता नहीं चलता। नियमित रूप से सिगरेट पीने से हमारे अंदर कई सारे बदलाव आते है जैसे कि सिगरेट ना मिलने पर हमारा दिमाग काम करना बंद कर देता है , स्वभाव में चिड़चिड़ापन आ जाता है और सिगरेट की तलब के कारण स्मोकर जो अपने साथ साथ दूसरों को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं।

   ऎसा नहीं है कि स्मोकर सिगरेट छोड़ने की कोशिश ही नहीं करता, वे कोशिश तो करता है परंतु नाकामयाब रहता है क्यूंकि सिगरेट में मिला निकोटिन उसके दिमाग पर इतना असर कर चुका होता है कि वे चाह कर भी स्मोकिंग करना नहीं छोड़ पाता। सिगरेट में मिलने वाले निकोटिन तय करता है कि स्मोकिंग आपके दिमाग पर किस प्रकार असर करेगी। जिस प्रकार निकोटिन की मात्रा हमारे दिमाग पर असर करेगी उसी प्रकार स्मोकिंग का असर शरीर और मन पर होगा।

   स्मोकिंग करते समय निकोटिन का एक डोज़ 10 सेकेंड के अंदर दिमाग तक पहुंच जाता है और मसल्स को रिलेक्स कर देता है। निकोटिन का दिमाग तक पहुंचना हमारा मूड अच्छा करने के साथ साथ भूख भी मिटा देता है। जब भी निकोटिन की सप्लाई हमारे दिमाग में कम होती है, तभी हमें ईसकी ज़रूरत महसूस होने लगती है और फिर से स्मोकिंग करते ही सब कुछ अच्छा लगने लगता है।

युवाओं में फैलता है सिगरेट का ट्रेंड :-


   आजकल हमारे समाज के युवा बहुत कम उम्र में ही ये सब शुरू कर देते हैं और इसका कारण है उनकी सोसाइटी। जब वे अपनी उम्र के लोगों को स्मोकिंग करते देखते है तो उनके मन में भी इसे ट्राई करने की इच्छा जाग उठती है। कई युवा अपनी मेच्योरिटी दिखाने के लिए भी स्मोकिंग करना शुरू कर देते हैं।

   सिगरेट पीने वाले लोग यह साचते हैं कि स्मोकिंग करने से उनका दिमाग शांत हो जाता है व तनाव कम हो जाता है और तनाव से पीछा छुड़ाने के लिए ही अक्सर वे स्मोकिंग करते हैं परंतु ऐसा होता नहीं है क्यूंकि रिलेक्स होने की फीलिंग जल्द ही खत्म हो जाती है और फिर से स्मोकिंग करने को दिल मचलने लगता है।

   घर या ऑफिस से उन्हें अनचाहा तनाव मिलते ही हल निकालने की बजाए वे स्मोकिंग करने लग जाते हैं जिससे की तनाव घटना नहीं बल्की और ज्यादा बढ़ जाता है।

कैसे छोड़ें सिगरेट :-


   अपना ज्यादा से ज्यादा समय परिवार और दोस्तों के साथ बिताएं और उन्हे अपनी इस आदत के बारे में बताएं जिससे की वे सब आपकी मदद कर सके।

   कोशिश करें की आप सिगरेट पीने वाले लोगों के साथ भी न बैठें जिन्हे देख के आपका मन सिगरेट की ओर आकर्शित हो।

   सिगरेट छुड़ाने के लिए 'निकोटेक्स' नामक च्यूनगम आता है। इसके मदद से भी आप धीरे-धीरे सिगरेट के लत छुड़ा सकते हैं।

   आप चाहें तो किसी डॉक्टर से भी परामर्श कर सिगरेट के लत को छुड़ा सकते हैं। आप अपने मन पर काबू रखने का प्रयास करें और सिगरेट से होने वाले नुकसान के बारे में जानकारी इकट्ठा करें।

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