गर्भिणी बर्तन - मृत बर्तन - HUMSAFAR MITRA NEWS

Advertisment

Advertisment
Sarkar Online Center

Breaking

Followers


Youtube

Thursday, May 21, 2020


लोककथा - गर्भिणी बर्तन, मृत बर्तन


'हमसफर मित्र' ज्ञान का दरवाजा


   दोस्तो, लालच कभी-कभी नुकसानदायक हो सकता है। लालचीपना में आदमी शुरू में तो सुख भोग लेते हैं पर उसका फल कभी न कभी जरूर मिलता है। आईये आज हम आपको ऐसा कहानी सुनाते हैं जिसमें एक व्यक्ति ने चतुराई से लालची सेठ का पुरा घमंड तोड़ देता है और उसके ही सामान को हड़प लेता हैं :-

   किसी गांव में एक धनी सेठ रहता था। उसके पास धातु से बने हुए ढेर सारे बर्तन थे। जिन्हें वह किराए पर दिया करता था। गांव के लोग शादी, ब्याह और अन्य अवसर पर उससे बर्तन लिया करते थे।

   ऐसे ही एक आदमी उससे बर्तन मांग कर ले गया। वापस करते समय उसने कुछ छोटे बर्तन बढ़ा कर दिए। धनी सेठ ने पूछा - यह बर्तन कैसे बढ़ गए ! उसने कहा मांग कर ले जाने वाले बर्तनों में से कुछ गर्भ से थे। यह छोटे बर्तन उन्हीं के बच्चे हैं।

   उसी दिन से सेठ को छोटे बर्तनों से लोभ हो गया। उसने बर्तन लौटाने वाले उस व्यक्ति को ऐसे देखा मानो उसे कहानी पर विश्वास हो गया हो। उसने सारे बर्तन रख ली। अब वह सभी लोगों को अधिक से अधिक बड़े बर्तन देता और वापस करने पर छोटे बर्तन भी मांगता। बर्तन न दे पाने पर वह गांव वालों पर चोरी का इल्जाम लगाता।

   कुछ दिन बाद वही व्यक्ति फिर - से बर्तन मांगने आया। सेठ ने मुस्कुराते हुए बर्तन दे दिए। काफी समय तक बर्तन वापस नहीं मिले। इस पर सेठ ने उस व्यक्ति से बर्तन न देने का कारण पूछा। बर्तन मांग कर ले जाने वाले व्यक्ति ने जवाब दिया - मैं वह बर्तन नहीं दे सकता, क्योंकि उनकी मृत्यु हो गई है। धनी सेठ ने पूछा बर्तन कैसे मार सकते हैं ? उत्तर मिला - यदि बर्तन बच्चे दे सकते हैं तो वह मर भी सकते हैं। सेठ की अपनी गलती का अहसास हुआ। और सेठ हाथ मलता रह गया।

No comments:

Post a Comment