दिल्ली की साक्षी की मौत का जिम्मेदार कौन? तमाशबीन भीड़ या कानून व्यवस्था...? - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Sunday, June 4, 2023

 'आज का आलेख' 

दिल्ली की साक्षी की मौत का जिम्मेदार कौन? तमाशबीन भीड़ या कानून व्यवस्था...? 

'हमसफर मित्र न्यूज' 



अब सवाल ये है कि इस मौत के लिए जिम्मेदार कौन है? वो लोग जो मौत का तमाशा देखते रहे या वो पुलिस जो वक्त पर काम ना आई? वैसे सच्चाई तो ये है कि इस लड़की की मौत के लिए सिर्फ पुलिस को ही क्यों जिम्मेदार ठहराया जाए? क्या उन पत्थर दिल इंसानों की कोई गलती नहीं जो तड़पते हुए उस लड़की के पास से बस तमाशबीन की तरह गुजरते चले गए? अगर उस वक्त एक हाथ भी मदद को आगे आ जाता तो क्या पता आज भी वो अपनी मां के आंचल मे होता। पर अफसोस! ऐसा हो नहीं हो सका। इस पत्थर दिल शहर में हर साल ऐसे ना जाने कितने लोग यू मर जाेते हैं। उनमें से बहुत से लोगों को बचाया जा सकता है। बस जरूरत सिर्फ दो अदद मददगार हाथों की है। इसलिए अगली बार जब भी आपको सड़क पर कोई तड़पता दिखाई दे तो प्लीज मुंह मत मोड़िएगा।

खुद को धर्म मजहब और जातियों में बांटकर इंसान इतना गिर गया है की उसे उसके सामने से हो रहा जुल्म भी उसे दिखाई नहीं देता

साक्षी हत्याकांड (दिल्ली) इस बात का जीता जागता प्रमाण है।

भीड़ के बीच एक सनकी किसी मासूम पर 40 बार चाकू से वार करता है

उसके बावजूद भी जब उस सनकी की सनक खत्म नहीं होती तो  पत्थर उठाकर उस मासूम का चेहरा कुचल देता है परंतु खुद को इंसान और मर्द कहलाने वाली तथाकथित भीड़ चुपचाप तमाशा देखती रह जाती है।

जो भीड़ राजनीतिक पार्टियों और नेताओं के कारण एक दूसरे को मारने पर उतारू हो जाती है

जो भीड़ किसी भूखे मासूम को एक रोटी चोरी कर लेने पर उसे सजा सुनाने को तैयार हो जाती है

वही भीड़ किसी मासूम की हत्या, बलात्कार के साथ अन्य जुल्म को होता देख नपुसंक बन जाती है

जिस दिन हर आम इंसान किसी जुल्म और अत्याचार के खिलाफ एकजुट होकर मुकाबला करना सीख गया

जिस दिन हर आम इंसान खुद को जाति,धर्म से परे हटकर खुद को इंसान समझने लगा बस उसी दिन उसी पल से कानून सर्वोपरी और समाज अपने परिवार बन जाएगा। मगर आज साक्षी को बचाने कोई हाथ सामने नही आया और आज साक्षी हत्याकांड की वीडियो को स्टेटस लगाकर वीडियो वायरल किया जा रहा है इससे बडी बेशर्मी क्या हो सकती है जब वो बचाओ बचाओ पुकार रही थी तो सब तमाशबीन बने देखकर गुजर रहे थे।

मासुमो और आम इंसान की हत्या आजकल आम बात हो चुकी है पर एक आम इंसान ही जब एक आम इंसान पर अत्याचार होता देख भी बस तमाशाबीन बन कर रह जाता है बस यही दुर्भाग्य है।

अपराधी संख्या में होते है और भीड़ अनगिनत उसके बावजूद अपराध भीड़ पर हावी है ये सोचनीय है।

मेरे भारत की बेटियां एक बात हमेशा याद रखना कभी भी दोगले इंसान से प्रेम मत करना।

माँ -बाप के बातों को हमेशा पालन करना तुम्हारी माँ और बाप कभी भी तुम्हारे बारे मे भले ही सोचेंगे क्योंकी उसने तुम्हे जन्म दिया है।



आलेख - गणेशदत्त राजू तिवारी मीडिया प्रभारी मस्तुरीः



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