जिंदगी को खूबसूरती से तराशती 'मोस्ट वांटेड जिंदगी' - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Tuesday, December 21, 2021



 जिंदगी को खूबसूरती से तराशती 'मोस्ट वांटेड जिंदगी'

'हमसफर मित्र न्यूज' 


एक छोटे शहर से निकलकर कामयाबी की ऊंचाइयों को छूने वाले 'गौरव उपाध्याय' की यह किताब- 'मोस्ट वांटेड जिंदगी', लोगों को उनकी मनचाही जिंदगी पाने का हुनर सिखाती है। साथ ही "ज़िंदगी में आगे चलते हुए मत भूलना, कितना पीछे से आए हो तुम" जैसी पंक्तियों के माध्यम से यह भी बताती है कि ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद जिस मिट्टी में हम बड़े हुए हैं, उसे कभी नहीं भूलना चाहिए।  किताब के माध्यम से लेखक, लोगों को इस जिंदगी को जिंदादिली से जीना याद दिला रहे हैं। उन्होंने किताब में ओवरथिंकिंग, डिप्रेशन, उदासी और उम्मीद खत्म होने जैसी मानसिक परेशानियों पर एक-एक करके बात की है और इन समस्यओं के चंगुल से बाहर आने के तरीके बताए हैं। यह किताब लेखक के जीवन के अनुभवों की एक सहज और बेहद ईमानदार अभिव्यक्ति है। 


गद्य और पद्य के मेल से लिखी गयी यह किताब, अपने आप में बेहद अनोखी है। पहले आप जिंदगी के पाठों को कविता के माध्यम से पढ़ते हैं, उसके बाद लेखक इन पाठों को इतने अच्छे तरीके से समझाते हैं कि सारे सबक पाठक के दिलो-दिमाग में एकदम साफ हो जाते हैं। कविता की कुछ पंक्तियां तो इतना गहरा अर्थ लिए हुए हैं कि उन्हें अपने कमरे की दीवारों पर लिखने का मन करने लगता है। जैसे इन पंक्तियों को ही देखिए- 

" तुम्हारे बीते वक्त की निशानियाँ तुम्हें बताती रहती हैं कि तुम कौन हो,

कभी कभी क्यूँ बोलते हो इतना, कभी क्यूँ आख़िर इतना मौन हो"

यह पंक्तियां बड़ी खूबसरती से बताती हैं कि किस तरह व्यक्ति के गुजरे हुए समय का प्रभाव उसके वर्तमान पर भी पड़ता है।


किताब को पढ़कर ऐसा लगता है जैसे कोई शुभचिंतक बड़े सहज रूप में जीवन की जरूरी बातें हमें समझा रहा है। समझा रहा है कि किन बातों पर विचार करके खुद को सुधारना है और किन बातों पर विचार करना छोड़कर खुद को कई तरह के बंधनों से मुक्त करना है। किताब में लिखी गयी बातों को पढ़कर आप ऐसा महसूस करेंगे कि अरे! ऐसा तो मेरे साथ भी होता है या यह तो मैं भी करता हूँ। साथ ही आप अनजाने में खुद से की गई छोटी छोटी गलतियों को भी समझने लगते हैं और मन ही मन उन्हें ना दोहराने का संकल्प करने लगते हैं। 


यह किताब अपने जीवन में कुछ सुधार लाने की इच्छा रखने वाले हर इंसान को पढ़नी चाहिए। गांव, कस्बों और छोटे शहरों से अपने सपनों को पूरा करने के लिए निकले मध्यवर्गीय युवाओं को यह किताब जरूर पढ़नी चाहिए। चूंकि लेखक खुद एक छोटे शहर के मध्यवर्गीय परिवार से निकलकर बुलंदियों तक पहुंचे हैं इसलिए वे मध्यवर्गीय युवाओं के सपनों, उनके रास्ते में आने वाले परेशानियों और लक्ष्य तक पहुंचने के रास्तों के बारे में अच्छी तरह से जानते हैं। इसलिए लेखक ने उनकी जिंदगी से जुड़े तमाम हिस्सों पर बड़ी गहराई से बात की है। उन्हें मुसीबत से हार ना मानने और कोशिश करते रहने की प्रेरणा दी है। साथ ही लक्ष्य पर पहुंचने के बाद अपने सफर को ना भूलने की भी हिदायत दी है। " जिद मंजिल की हो, मगर, मंजिल पर पहुंचकर सफर को याद रखा जाए"।


हिंदी में जीवन और जीवन जीने की कला से जुड़ी हुई किताबें बेहद कम हैं। ऐसे में यह किताब उस खाली जगह को भरने का प्रयास करती है। यह किताब जिंदगी से हार मान कर एक कोने में बैठ चुके और उदासी को अपनी नियति मान चुके लोगों में उम्मीद जगाने का काम करती है। किताब हार मान चुके लोगों के एक-एक डर पर बात करती है, जिससे कोई भी डर या असुरक्षा की भावना मन के किसी कोने में ना बैठी रह जाए। आखिर में किताब की दो पंक्तियों के साथ मैं अपनी बात खत्म खत्म करता हूँ-

" जो हारे तो फिर से वापस खेल में आने का जुनून होना चाहिये,

और जीत का एक अहम मक़सद ज़ेहन का सुकून होना चाहिए"।

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