बिलासपुर में बकरे की बलि को लेकर दो पक्षों में मारपीट, मामला पँहुचा थाने
बिलासपुर से 'राकेश खरे' की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर में न्याय के लिए अब बकरे भी थाने में पहुंचने लगे हैं.. ताजा मामला बिलासपुर के सिविल लाइन थाने का है.. जहां दो पक्ष थाने पहुंचे गए.. एक पक्ष का आरोप है कि दूसरा पक्ष बकरे को आज मगरपारा स्थित मरिमाई मंदिर में बलि देने जा रहे था.. मरिमाई मंदिर के मुख्य पुजारी और पूर्व महापौर उमाशंकर जायसवाल का कहना था कि.. मंदिर में बलि की प्रथा सालों से बंद है.. और बकरे की बलि नहीं दी जा रही थी.. वहीं विरोध में थाने पहुंचे लोगो का आरोप है कि.. बलि देने वालो और पुजारी की मिलीभगत से मंदिर में बलि देने की तैयारी पूरी हो चुकी थी.. दोनों पक्ष सिविल लाइन थाना प्रभारी के कमरे में जमकर बहस की.. वहीं सिविल लाइन थाना प्रभारी ने दोनों पक्षों की बात सुनकर बकरे को एनजीओ को प्रदान कर दिया.. एनजीओ की सदस्यों ने लिखित में बकरा को अपने कब्जे में लिया और वहां से निकल गई.. पूरे मामले में सिविल लाइन थाना प्रभारी शनिप रात्रे ने सूझबूझ से काम लिया इस वजह से मामला खत्म हो गया..
लेकिन इस बीच एनजीओ के सदस्यों की लापरवाही भी सामने आई मीडिया से बात करते हुए उनके उल्टे सीधे जवाब सवालों को जन्म देने के लिए काफी है.. बिलासपुर जिले में जगह-जगह मांस के दुकान मौजूद है जब सदस्यों से पूछा गया कि उनको बंद करवाएंगे तो उनका जवाब रहा कि वे उस जगह आंख बंद करके निकल जाते हैं..
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