आयुर्वेद के अनुसार उल्टी के 5 प्रकार और कारण - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Wednesday, June 2, 2021

 'आज का सेहत' 

आयुर्वेद के अनुसार उल्टी के 5 प्रकार और कारण 

प्रस्तुति - 'एम. के. सरकार (संपादक) 

' हमसफर मित्र न्यूज '





ऐसे तो उल्टी के समस्या बारह महिने कभी भी हो सकती हैं, लेकिन गर्मियों के मौसम में यह ज्यादा दिखाई देता है। आमतौर पर शरीर में पानी की कमी तथा बदहजमी होने पर उल्टियां लगना अथवा होना स्वाभाविक बात है। आयुर्वेद में उल्टी के 5 प्रकार उल्लेख किया गया है, आइए 'हमसफर मित्र न्यूज' के 'आज का सेहत' में जानते हैं उल्टी के 5 प्रकार और कारण के बारे में... 


उल्टी आना कोई गंभीर समस्या नहीं है, बल्कि दिनचर्या, खानपान में बदलाव के कारण भी ऐसी समस्याएं हो सकती हैं। लेकिन आयुर्वेद में उल्टी के इन 5 प्रकारों का वर्णन मिलता है। आखिर कौन से हैं ये प्रकार और क्यों आती है इस तरह की उल्टी...जानिए...  


1. वातज। 

 2. कफज । 

 3. पित्तज । 

4. त्रिदोषज। 

5. आगंतुज।


1. वातज  : 

पेट में गैस से होने वाली उल्टी वातज की श्रेणी में आती है। इस तरह की उल्टी कम मात्रा में कडुवी, झागवाली और पानी जैसी होती है। लेकिन कई बार इसके साथ सिर का दर्द, सीने में जलन, नाभि में जलन, खांसी और आवाज का खराब होना आदि समस्याएं भी होती हैं।


2. पित्तज : 

पित्त की गर्मी के कारण होने वाली उल्टी पित्तज की श्रेणी में आती है। इस स्थिति में पीले, हरे रंग की उल्टी आती है और मुंह का स्वाद बेहद बुरा होती है। इसमें भोन नली व गले में जलन हो सकती है। सिर घूमना, बेहोशी भी इसके लक्षणों में शामिल है।


3. कफज : 

कफ के कारण होने वाली उल्टी इस श्रेणी में आती है। इसमें उल्टी का रंग सफेद और प्रकार गाढ़ा होगा। इसका स्वाद मीठा होता है। मुंह में पानी भरना, शरीर का भारी होना, बार-बार नींद आना, जैसे लक्षण इस प्रकार की उल्टी में होना स्वाभाविक हैं।


4. त्रिदोषज : 

त्रिदोषज उल्टी वह होती है जो वात, पित और कफ, तीनों कारणों के चलते होती है। यह गाढ़ी, नीले रंग की या खून की हो सकती है। स्वाद में नमकीन या खट्टी हो सकती है। इसके अलावा पेट में तेज दर्द, भूख में कमी, जलन, सांस लेने में परेशानी और बेहोशी भी इसके लक्षणों में शामिल है।


5. आगंतुज : 

इस तरह की उल्टी बदबू, गर्भावस्था, अरूचिकर भोजन, पेट में कीड़े या किसी स्थान विशेष पर जाने से हो सकती है। इस तरह की उल्टी को  आगंतुज छर्दि भी कहते हैं।

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