बच्चों ने सीखना छोड़ दिया तो जीतना छोड़ देंगे : श्री डी पी कोइरी
नवागढ़ से दुजेय साहू की रिपोर्ट
'हमसफर मित्र न्यूज'।
शासन के योजना पढ़ाई तुंहर पारा बच्चों को छोटे-छोटे समुदायिक विद्यालयों में सीखने सिखाने का अवसर देने हेतु गांवों( *अतरगवा, नवलपुर*) में मोहल्ला क्लास का संचालन किया जा रहा है जिसमें बड़ी संख्या में स्वेच्छा से वॉलिंटियर्स (12वीं कक्षा व कॉलेज के छात्र) अपनी सेवा दे रहे हैं ।निरीक्षण में आये सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी डी पी कोइरी ने कहा "बच्चों ने सीखना छोड़ दिया तो आगे जीतना छोड़ देंगे"। इसलिए जरूरी है कि बच्चों को इस संकट के काल में पढ़ाई का विकल्प सीखने का अवसर दिया जाए ।वालंटियर के रूप में काम कर रहे युवक युवतियों को प्रेरित करते हुए उन्होंने कहा कि हमेशा हर कार्य का प्रतिफल अपना लाभ नहीं बल्कि निस्वार्थ सेवा से ही देश की सच्ची सेवा की जा सकती है , क्योंकि आज जो निःस्वार्थ भाव से काम कर रहे हो इसका एक दिन निश्चित ही दूरगामी परिणाम आएगा। सभी वालंटियर्स को लगन के साथ अध्यापन कराने के लिए कहा। प्राथमिक शाला नवलपुर की प्रभारी प्रधान पाठिका सुशीला बर्मन को क्लास विस्तार व समय समय मे निरीक्षण करने के लिए कहा।
संकुल समन्वयक योगेश पांडेय ने संकुल केंद झाल के अंतर्गत संचालित मोहल्ला क्लास के बारे में बताते हुए कहा कि शासन के योजनानुसार शिक्षकों के द्वारा बेहतरीन कार्य किया जा रहा है। अभी प्राथमिक शाला अतरगवा, गाड़ामोर, नवलपुर, मानिकपुर, रनबोड , खपरी जी, एवं माध्यमिक शाला झाल में मोहल्ला क्लास संचालित है। आने वाले कुछ दिनों में संकुल के सभी स्कूलों में मोहल्ला क्लास लगाने का लक्ष्य रखा गया हैं। कुछ स्कूलों में स्वयं शिक्षक उपस्थित होकर मोहल्ला क्लास ले रहे है।
हमारा लक्ष्य हर बच्चे तक शिक्षा के सुलभ पहुंच के लिए सरकार और प्रशासन की विभिन्न प्रयास वर्तमान परिस्थिति में काबिले तारीफ है। इसमें जमीनी स्तर पर सहयोग दे रहे शिक्षकों का प्रयास भी सराहनीय है।
*प्राथमिक शाला अतरगवा के शिक्षको का मेहनत रंग लाया*
शासकीय प्राथमिक शाला अतरगवा संकुल झाल,विकासखंड नवागढ़ जिला बेमेतरा के शिक्षक वर्तमान वैश्विक कोरोना महामारी के समय भी शिक्षा की निरंतरता को बरकरार रख कर बच्चों को शिक्षा से जोड़ कर रखे हुए हैं। ऑनलाइन पढ़ाई में सभी पालकों के पास स्मार्टफोन की अनुपलब्धता एवं नेटवर्क की समस्या थी ।जिसके चलते सभी बच्चों तक पहुंच बनाना जरूरी था। शिक्षकों ने पालकों से सतत संपर्क किया एवं ऑफलाइन पढ़ाने की योजना बनाई। समुदाय के पढ़े-लिखे युवाओं से इसके लिए मदद की बात आई तो शासन की योजना "पढ़ाई तुंहर पारा (मोहल्ला क्लास) के अंतर्गत आती है। शिक्षकों ने शिक्षा सारथी (वॉलिंटियर) के नाम से (9) पढ़े लिखे युवाओं को अपने ही मोहल्ले में बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया, जिसमें ललिता भास्कर, बिसाहू राम साहू, संजय साहू, रोहन साहू, कौशिल्या साहू, मनीप्रकाश, शेरसिंह, जैकीचन्द एवं रीटा बंजारे शामिल हैं। आठ स्थानों पर अलग-अलग कक्षा को अलग अलग समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए शिक्षकों के साथ यह आज बच्चों को बेहतर शिक्षा दे रहे हैं। इसके लिए विद्यालय के शिक्षकों द्वारा व्हाइट बोर्ड, मार्कर पेन ,कॉपी, पेन, चार्ट, चाक, साबुन आदि उपलब्ध कराया गया। शासन की ओर से सूखा एवं निशुल्क पाठ्य पुस्तक एवं गणवेश बच्चों को दिया जा रहा है।
इसी क्रम में पालकों के वर्तमान आर्थिक परिस्थिति को देखते हुए प्राथमिक शाला के शिक्षकों ने स्वयं के खर्च से काफी एवं पेंसिल जरूरतमंद बच्चों को खरीद कर दिया। कहीं ना कहीं यह शिक्षकों के द्वारा एक अच्छी और नेक पहल को दर्शाती है। इनके अच्छे प्रयासों का परिणाम है जिसके चलते प्राइवेट स्कूल में भेज रहे अपने बच्चों को पालक हमारी सरकारी स्कूल में भर्ती करा रही है। पिछले वर्ष की अपेक्षा दर्ज संख्या 106 से बढ़कर 125 हो गया है। हम सब मिलकर वर्तमान परिस्थिति को शिक्षा के क्षेत्र में बाधक नहीं बनने दे और इसमें सब मिलकर काम करें ताकि बच्चों की बेहतर भविष्य को सुरक्षित कर सके। सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारी एवं संकुल समन्वयक योगेश पांडे झाल ने , *प्रभारी प्रधान पाठक कुमार वर्मा, शिक्षक राजेश ठाकुर एवं शिक्षिका संजीवा राय* को धन्यवाद दिया और उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा, जो नौनिहालों के बेहतर के लिए काम कर रहे हैं।



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