शिव जी के गले में मुंड माला का रहस्य - HUMSAFAR MITRA NEWS

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Saturday, July 25, 2020


जय जय श्रीराम।  🙏🏻🙏🏻🙏🏻  रामचरित्र मानस।। 


शिव जी के गले के मुंड माला का रहस्य 

 'हमसफर मित्र'।        

   एक दिन नारद जी माता पार्वती जी से मिलने कैलाश  पर्वत आया।  पार्वती जी ने कहा कैसे आना हुआ..? नारद जी ने कहा  क्या बताये माता, मन बड़ा अप्रसन्न और दुखी है। क्यो दुखी हो..? माता ने कहा। पति पत्नी में, गुरु चेला में , पिता पुत्र  जहा देखो  वहाँ शत्रुता। कोई किसी का विस्वास नही करते मन बहुत दुखी है। पार्वती जी ने कहा छोड़ो दुनिया की बाते  हमे दुनिया से क्या लेना देना है।  हमारा गृहस्त जीवन इतना बढ़िया चल रहा है  न तो बाबा हमसे  कोई बात छुपाते है न हम बाबा शंकर से कुछ छुपाते है। हमारा बहुत अच्छा जीवन चल रहा है । नारद जी को मौका  मिल गया नारद जी ने कहा  माता जी तब तो शंकर बाबा ने  आपको एक बात जरूर बताई होगी । कौन सी..? माता ने कहा। उनके गले  मे जो मुंडो की माला पड़ी है उनका रहस्य जरूर बताया होगा।  पार्वती जी बोली  नही नारद, इसके बारे में हमे आज तक पता नही है। नारद जी ने कहा माता जी आप तो कह रही थी  हमसे बाबा शंकर कुछ नही छुपाते।     हमे क्या पता  बाबा शंकर  आपको बताया होगा करके पूछा, नारद जी ने पार्वती जी के मन मे लगाई आगौर। कहा हमे क्या करना ताजी - ताजी आग लगी है करके नारद जी वहां से निकल गये। जैसे ही नारद जी  निकले बाबा  शंकर को कहा माता जी आपको बुला रही है । शंकर जी मन मे सोचने लगे नारद जी निकले है कुछ न कछु गड़बड  जरूर किया होगा।         बाबा जैसे अंदर आये  पार्वती जी भोजन परोस रखा सामने । जैसे  भोजन उठाया ग्रास मुँह में डालना चाहता। ,,,,,पार्वती  जी कहने लगी  माताओ का स्वभाव होता है  ये  दिन भर के जितनी  भी बाते होतीं है  रात्रिमें पति जब  भोजन के लिये बैठतीं है तो सारा दिन भड़क प्रवचन शुरू कर देती है । माताओ का स्वभाव होता है। क्योंकि दिन भर पतिको इनकी  बात सुनने के टाइम ही नही रहता है।   लेकिन रात्रि को बच्चू भगकर जाओगे कहा! घर मे रहना पड़ेगा, इसी लिये पार्वतीजी ने कहा महराज, आपसे कुछ कहना चाहती हूँ। बाबा ने कहा भोजन बाद मे  क्या कहना चाहती हो..? पार्वती जी ने कहा महराज आपने जो गले मे मुंडोकी माला पहन रखी है  ये मुण्ड किसके हैं और कौन देवी की है..? बाबा भोलेनाथ ने कहा अच्छा! नारद का चक्कर लगा है। क्योंकि, ये  बात तुम्हारी तो हो  ही नही सकती। पार्वती जी बोली  किसी का भी बात हो लेकिन आज आप बताओ कि  मुंडो की माला क्यो पहन रखी है..? आज तक छाती से लगाये  हो,  गले मे। भोले बाबा के आखो में आँसू झलक गई, फिर बताया कि पार्वती, ये सारे के सारे मुण्ड तुम्हारे है। पार्वती जितनी बार तुम मेरी हो उतनी बार तुम्हारे  सिर को अपने माला में  पिरोते चला गया  मैं। तुम्हे  इतना प्रेम करता हू, तुम्हारे मरने के बाद भी तुम्हे भूल नही पता हु । इतनी बार तुम मेरी हो। पार्वती जी रोने लगी आप मुझे इतना प्रेम करते है  मेरा भी वचन है   ,,,,,,,,,,,,,जन्म कोटि लगी रगर हमारी , ,,,बरऊ  शंभु न  त रहउ कुँवारी।    
   बालकाण्ड  दोहा नं. 80  चौपाई नं. 3 
 इसके आगे  कल फिर...
 जय श्री राधे 🙏

पंड़ित श्री प्रदुम्न जी महराज। मुढ़ीपार  बिल्हा ९९२६२७३७७२

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