शहद बढ़ाता है रोग प्रतिरोधक क्षमता
शहद को हम मधु और मदरस के नाम से भी जानते हैं। शहद ही एक ऐसा चीज है जो हजारों वर्ष तक खराब नहीं होता है। मधुमक्खियों द्वारा असंख्यों फूलों से रस प्राप्त कर मधुरस बनाते हैं। फूलों के रस का सभी औषधि गुण मदरस में समा जाती है।
आयुर्वेद ने मदरस के गुणों से प्रभावित होकर इससे तरह-तरह के दवाओं का निर्माण किया है। मदरस में एंटीबायोटिक गुण होने का भी दावा किया गया है। इसलिए मदरस से एक नहीं अनेकों रोगों का इलाज करना मुनासिब समझा गया है।
अमेरिका के अनुसंधानकर्ताओं ने भी दावा किया है और लंबे अध्ययन के बाद इस बात का पता लगाया है कि शहद में प्रचुर मात्रा में एंटीबायोटिक तत्व मौजूद होते हैं, जो न केवल कटी-फटी त्वचा एवं घावों को शीघ्र भरते हैं बल्कि किसी भी प्रकार के संक्रमण को पूरी तरह रोकने में सक्षम है। साथ ही प्रतिरोधात्मक क्षमता भी बढ़ाता है। इजराइल में फेफड़ें और अल्सर आदि की चिकित्सा के लिए शहद का खुब प्रयोग किया जाता है।


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